मिसाइल के साथ अब ड्रोन की ताकत भी चर्चा में, जानिए क्यों दुनिया में सबसे खतरनाक माना जाता है यह अमेरिकी ड्रोन
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब ड्रोन तकनीक भी युद्ध की बड़ी ताकत बनती जा रही है। पहले जहां मिसाइलों को सबसे खतरनाक हथियार माना जाता था, वहीं अब ड्रोन भी युद्ध की रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हाल के घटनाक्रमों में यह देखा गया है कि कई देश ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमले दोनों के लिए कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन कम लागत में लंबी दूरी तक काम कर सकते हैं और लगातार निगरानी करने में भी सक्षम होते हैं। यही वजह है कि कई देश अब अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए ड्रोन तकनीक पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली ड्रोन की चर्चा
दुनिया के सबसे शक्तिशाली ड्रोन की बात करें तो अमेरिका का एमक्यू-9 रीपर काफी चर्चा में रहता है। यह ड्रोन पहली बार 2001 में उड़ान भर चुका था और कुछ साल बाद इसे अमेरिकी वायुसेना में शामिल किया गया। समय के साथ इसमें कई तकनीकी सुधार किए गए, जिसके कारण इसे आधुनिक सैन्य तकनीक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी के साथ-साथ सटीक हमलों के लिए भी किया जाता है।
लंबी उड़ान और भारी हथियार ले जाने की क्षमता
एमक्यू-9 रीपर की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी उड़ान क्षमता मानी जाती है। यह ड्रोन करीब 27 घंटे तक लगातार हवा में उड़ान भर सकता है। इसके अलावा यह बड़ी मात्रा में हथियार और उपकरण भी ले जा सकता है। बताया जाता है कि यह करीब 1700 किलोग्राम तक का भार उठा सकता है। इसी वजह से इसे कई प्रकार के सैन्य अभियानों में उपयोगी माना जाता है।
निगरानी और हमले दोनों में सक्षम तकनीक
इस ड्रोन को अक्सर हंटर-किलर ड्रोन भी कहा जाता है क्योंकि यह दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकता है। इसमें आधुनिक सेंसर और निगरानी उपकरण लगाए गए हैं, जो लक्ष्य की पहचान करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी तकनीक भविष्य के युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, क्योंकि इससे दूर से ही लक्ष्य पर सटीक कार्रवाई संभव होती है।
