कई लोगों की सुबह की शुरुआत ताजगी के बजाय दर्द और अकड़न के साथ होती है। आंख खुलते ही गर्दन जकड़ी हुई महसूस होती है, कमर में दर्द रहता है और कंधों में भारीपन महसूस होता है। आमतौर पर लोग इसे बढ़ती उम्र या दिनभर की थकान का नतीजा मान लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
रात में शरीर कैसे करता है काम?
विशेषज्ञ बताते हैं कि नींद केवल आराम का समय नहीं है। इसी दौरान शरीर खुद की मरम्मत करता है। मांसपेशियों की रिकवरी, रक्त संचार और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं रात में ही पूरी होती हैं। यदि किसी वजह से यह प्रक्रिया प्रभावित होती है तो सुबह शरीर दर्द और थकान महसूस कर सकता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में सोने से भी जोड़ों और मांसपेशियों में अकड़न आ सकती है।
गलत तकिया और गद्दा बन सकते हैं कारण
कई बार समस्या की वजह हमारी सोने की व्यवस्था भी होती है। यदि तकिया बहुत ऊंचा या बहुत नीचा हो तो गर्दन की मांसपेशियों पर लगातार दबाव बना रहता है। इसी तरह खराब या पुराना गद्दा रीढ़ की हड्डी को सही सपोर्ट नहीं दे पाता। इसका असर कमर, कंधों और पीठ पर पड़ता है। यही कारण है कि सुबह उठने के बाद कुछ लोगों को चलने-फिरने में भी परेशानी महसूस होती है।
खराब नींद और तनाव का असर
नींद की खराब गुणवत्ता भी सुबह होने वाले दर्द की बड़ी वजह मानी जाती है। यदि रात में बार-बार नींद टूटती है या पर्याप्त नींद नहीं मिलती तो शरीर पूरी तरह रिकवर नहीं हो पाता। तनाव और चिंता भी मांसपेशियों में खिंचाव पैदा कर सकते हैं। कई शोधों में पाया गया है कि खराब नींद शरीर में सूजन बढ़ाती है, जिससे दर्द की समस्या और ज्यादा महसूस हो सकती है।
इन बीमारियों का भी हो सकता है संकेत
हर बार सुबह का दर्द सामान्य नहीं होता। अगर दर्द और अकड़न लंबे समय तक बनी रहती है तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, फाइब्रोमायल्जिया, विटामिन डी की कमी और स्लीप एपनिया जैसी समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
राहत पाने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार नियमित समय पर सोना और जागना, रोजाना हल्की एक्सरसाइज करना, सोने से पहले स्ट्रेचिंग करना और पर्याप्त पानी पीना इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही आरामदायक गद्दा और सही तकिया चुनना भी जरूरी है। यदि दर्द लगातार बना रहे या समय के साथ बढ़ता जाए तो डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित और सही कदम माना जाता है।
