logo

BREAKING NEWS
अमेरिका ने छीना LPG का ताज? भारत की गैस खरीद में बड़ा उलटफेर, सऊदी-कतर पीछे छूटे

अमेरिका ने छीना LPG का ताज? भारत की गैस खरीद में बड़ा उलटफेर, सऊदी-कतर पीछे छूटे

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा नीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वर्षों तक LPG के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहने वाला भारत अब तेजी से अमेरिका की ओर रुख कर रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कुछ महीने पहले काफी कम थी।

सऊदी, कतर और UAE की हिस्सेदारी घटी

भारत पारंपरिक रूप से सऊदी अरब, कतर, कुवैत और UAE से बड़ी मात्रा में LPG खरीदता रहा है। लेकिन क्षेत्रीय तनाव और आपूर्ति प्रभावित होने के कारण इन देशों की संयुक्त हिस्सेदारी में भारी गिरावट दर्ज की गई है। फरवरी में जहां इन देशों का योगदान 80 प्रतिशत से अधिक था, वहीं मई तक यह काफी नीचे आ गया। इस खाली जगह को अमेरिका ने तेजी से भर दिया।

अमेरिका से रिकॉर्ड LPG आयात

मई महीने में अमेरिका से भारत को LPG की आपूर्ति में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई। बढ़ती मांग और खाड़ी क्षेत्र में सप्लाई बाधित होने के कारण भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी कार्गो पर ज्यादा भरोसा दिखाया। इससे घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिली और संभावित संकट को काफी हद तक टाला जा सका।

घरेलू स्तर पर भी उठाने पड़े कदम

आपूर्ति प्रभावित होने के बाद सरकार को कई एहतियाती कदम उठाने पड़े। घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए कुछ क्षेत्रों में LPG वितरण को नियंत्रित किया गया। साथ ही देश में LPG उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए गए, जिससे आयात पर दबाव कुछ कम हो सके।

रूस अब भी तेल का सबसे बड़ा साथी

जहां LPG के मामले में अमेरिका आगे निकल गया है, वहीं कच्चे तेल की आपूर्ति में रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा भागीदार बना हुआ है। भारतीय रिफाइनरियां रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रही हैं। इसके अलावा ओमान और अन्य वैकल्पिक स्रोतों से भी आयात बढ़ाया गया है ताकि ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।

ऊर्जा बाजार में बदल रहा समीकरण

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात ने वैश्विक ऊर्जा व्यापार का संतुलन बदल दिया है। भारत अब केवल पारंपरिक खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों से ऊर्जा खरीदने की रणनीति अपना रहा है। इससे भविष्य में किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर देश की ऊर्जा सुरक्षा पर कम असर पड़ेगा।

Leave Your Comment