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इश्क से अपराध तक का सफर, कैसे ‘मोंटी’ बना खौफ का नाम और खत्म हुई कहानी

इश्क से अपराध तक का सफर, कैसे ‘मोंटी’ बना खौफ का नाम और खत्म हुई कहानी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में पुलिस मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी आशु उर्फ मोंटी का अंत हो गया। थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई में पुलिस की जवाबी फायरिंग में उसे गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार के लोग शव लेने पहुंचे और उसके अतीत से जुड़े कई अहम खुलासे सामने आए।

परिवार ने बताई शुरुआत की कहानी
परिजनों के अनुसार, आशु ने 12वीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन साल 2010 में उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। गांव के एक विवाद के दौरान उसने पहली हत्या की वारदात को अंजाम दिया, जिसके बाद उसका जीवन पूरी तरह बदल गया। परिवार ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना और धीरे-धीरे अपराध के रास्ते पर आगे बढ़ता चला गया।

गांव छोड़कर अपराध की राह
जेल से बाहर आने के बाद आशु का व्यवहार पूरी तरह बदल चुका था। उसके संपर्क में अपराधी किस्म के लोग आने लगे और गांव में उसकी गतिविधियों को लेकर विरोध भी हुआ। परिवार के दबाव के बाद उसने गांव छोड़ दिया और दिल्ली एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में रहने लगा। बाद में वह गाजियाबाद में छिपकर रहने लगा और वहीं से अपने नेटवर्क को संचालित करता रहा।

निजी जिंदगी भी बनी रहस्य
आशु की निजी जिंदगी भी रहस्यों से भरी रही। उसने अपने परिवार को बिना बताए शादी कर ली थी। बताया गया कि उसने करीब एक साल पहले रायबरेली की एक युवती से विवाह किया था, लेकिन इस बारे में किसी को जानकारी नहीं दी। शादी के बाद उसने परिवार से पूरी तरह दूरी बना ली और अपने पुराने रिश्तों को खत्म कर दिया।

रंगदारी के लिए पहुंचा था मुरादाबाद
पुलिस के अनुसार, आशु मुरादाबाद एक व्यापारी से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी वसूलने के इरादे से आया था। इसी दौरान मेरठ एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम से उसकी मुठभेड़ हो गई। जवाबी कार्रवाई में उसे सीने में तीन गोलियां लगीं, जिससे उसकी मौत हो गई। यह मुठभेड़ उसके आपराधिक सफर का अंतिम पड़ाव साबित हुई।

36 मामलों में था वांछित अपराधी
आशु का आपराधिक रिकॉर्ड बेहद गंभीर था। उस पर हत्या, लूट और रंगदारी जैसे कुल 36 मुकदमे दर्ज थे। जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात कुख्यात गिरोह के सदस्यों से हुई, जिसके बाद उसने अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बना ली। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया और गांव में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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