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हिमाचल प्रदेश में मॉनसून का कहर, अब तक 300 से अधिक लोगो की मौतें, ₹4,079 करोड़ का नुकसान

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून का कहर, अब तक 300 से अधिक लोगो की मौतें, ₹4,079 करोड़ का नुकसान

हिमाचल प्रदेश में 2025 के मॉनसून सीजन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और ₹4,079 करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। भारी बारिश, बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ ने राज्य के कई हिस्सों को प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप बुनियादी ढांचे, संपत्ति और आजीविका को व्यापक क्षति पहुंची है।

20 जून से 7 सितंबर 2025 तक, हिमाचल प्रदेश में मॉनसून से संबंधित घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं में कुल 366 लोगों की जान गई है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (एसईओसी) के अनुसार, इनमें से 203 मौतें बारिश से संबंधित घटनाओं जैसे भूस्खलन (42 मौतें), बादल फटने (17 मौतें), और फ्लैश फ्लड (9 मौतें) के कारण हुईं। शेष 163 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुईं, जो खराब मौसम, फिसलन भरी सड़कों और भूस्खलन के मलबे के कारण बढ़ गईं। इसके अलावा, 41 लोग अभी भी लापता हैं।

जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, मंडी, कांगड़ा और शिमला सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं। मंडी में 51, कांगड़ा में 49 और शिमला में 29 मौतें दर्ज की गईं। बारिश से संबंधित मौतों में मंडी (29), कांगड़ा (30) और चंबा (14) सबसे आगे हैं, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में चंबा और मंडी (22-22) और कांगड़ा (19) में सबसे अधिक मौतें हुईं।

आर्थिक और संपत्ति नुकसान

मॉनसून के कारण हिमाचल प्रदेश को ₹4,079 करोड़ का अनुमानित नुकसान हुआ है। 6,025 घर और 455 दुकानें/कारखाने पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। फसलों को ₹1,70,757.50 लाख और बागवानी को ₹1,07,043.50 लाख का नुकसान हुआ। 1,885 पशुओं और 25,755 से अधिक मुर्गी पक्षियों की मौत हुई। सड़कों, जल आपूर्ति योजनाओं, बिजली बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को भारी नुकसान हुआ। अकेले बिजली बुनियादी ढांचे को ₹1,439.30 लाख का नुकसान हुआ, जबकि ग्रामीण और शहरी विकास क्षेत्रों में संयुक्त नुकसान ₹2,456 करोड़ से अधिक है।

मॉनसून ने राज्य के बुनियादी ढांचे को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, इनमें 869 सड़कें, जिनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-3, एनएच-5, और एनएच-305) शामिल हैं, भूस्खलन, बाढ़ और मलबे के कारण बंद हैं। 1,572 बिजली ट्रांसफार्मर और 389 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं। 135 बड़े भूस्खलन, 95 फ्लैश फ्लड और 45 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया और राहत कार्य

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु ने पूरे राज्य को "आपदा प्रभावित" घोषित किया है और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2025 की धारा 24 की उप-धारा (ई) के तहत अधिसूचना जारी की है। उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है।

सरकार ने राहत शिविरों में रहने वाली प्रभावित परिवारों के लिए ₹5,000 प्रति माह किराये की सहायता की घोषणा की है। इसके अलावा, भोजन और राशन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और अन्य एजेंसियां मंडी, कुल्लू और चंबा जैसे सबसे अधिक प्रभावित जिलों में बचाव कार्यों में लगी हैं।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि स्कूलों को स्थानीय स्तर पर बंद करने का अधिकार दिया गया है, और जहां संभव हो, ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। शिक्षा विभाग ने क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को बहाल करने के लिए ₹16 करोड़ जारी किए हैं।

जलवायु परिवर्तन और चेतावनियां

मुख्यमंत्री सुखु ने जलवायु परिवर्तन को इस व्यापक प्राकृतिक आपदा का प्रमुख कारण बताया है। 1 जून से 6 सितंबर तक, हिमाचल में 943.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 648.1 मिमी से 46% अधिक है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने चंबा, कांगड़ा और मंडी के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें और भूस्खलन और सड़क अवरोधों की चेतावनी दी गई है।

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