उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बीजेपी विधायक रत्नाकर मिश्रा जल जीवन मिशन के अधिकारियों पर भड़कते नजर आ रहे हैं। यह मामला उस समय सामने आया जब विधायक कोन ब्लॉक के गोबरहा गांव में योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे। उनके साथ नमामि गंगे विभाग की एडीएम विजेता भी मौजूद थीं। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने अपनी परेशानी खुलकर सामने रखी, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
ग्रामीणों ने बताई बड़ी समस्या
गांववालों ने विधायक को बताया कि गांव में नल तो लगाए गए हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आता। लोगों ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन का फायदा उन्हें नहीं मिल रहा है और व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है। यह सुनते ही विधायक का गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि आखिर किस गांव में नियमित पानी की सप्लाई हो रही है। अधिकारियों के पास इसका ठोस जवाब नहीं था।
अधिकारियों के जवाब से बढ़ा गुस्सा
जब अधिकारियों ने पाइपलाइन डैमेज होने की बात कही, तो विधायक इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक जगह की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे इलाके में पानी की आपूर्ति बाधित है। विधायक ने आरोप लगाया कि अधिकारी सही जानकारी नहीं दे रहे हैं और काम में लापरवाही कर रहे हैं। इसी दौरान उनका गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने सख्त और तीखे शब्दों में अधिकारियों को फटकार लगाई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
कड़े शब्दों में दी चेतावनी
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विधायक अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए सख्त भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि बहानेबाजी बंद करें और काम को तुरंत दुरुस्त करें। उन्होंने यह भी कहा कि अगर व्यवस्था ठीक नहीं हुई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। विधायक के इस तेवर ने साफ कर दिया कि वह इस मुद्दे को लेकर बिल्कुल गंभीर हैं और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
22 तारीख तक का अल्टीमेटम
विधायक रत्नाकर मिश्रा ने अधिकारियों को 22 तारीख तक का समय दिया है। उन्होंने निर्देश दिया कि तय समय सीमा के भीतर पानी की आपूर्ति पूरी तरह से बहाल की जाए। साथ ही एडीएम को भी निर्देशित किया कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लिखित कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाए।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि तय समय सीमा के भीतर व्यवस्था में कितना सुधार होता है। फिलहाल यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जिले में जल व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल बन गया है और लोगों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
