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लद्दाख के सियाचिन में भीषण हिमस्खलन, 3 जवान शहीद, बचाव कार्य जारी

लद्दाख के सियाचिन में भीषण हिमस्खलन, 3 जवान शहीद, बचाव कार्य जारी

लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में 7 सितंबर 2025 को हुए एक भीषण हिमस्खलन ने भारतीय सेना के तीन जवानों की जान ले ली। यह हादसा दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में एक बेस कैंप के पास हुआ, जहां अचानक बर्फ गिरने से जवान बर्फ और मलबे में दब गए। शहीद होने वालों में दो अग्निवीर और एक अन्य जवान शामिल थे। भारतीय सेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया, और तीनों जवानों के शव बरामद कर लिए गए। इस घटना ने पूरे देश में शोक की लहर पैदा कर दी है।

यह हादसा रविवार, 7 सितंबर 2025 को 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन बेस कैंप के पास हुआ। खबरों के अनुसार, जवान उस समय गश्त कर रहे थे, जब अचानक भारी हिमस्खलन ने उनकी चौकी को अपनी चपेट में ले लिया। सियाचिन ग्लेशियर, जहां तापमान नियमित रूप से -60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, अपनी कठिन परिस्थितियों और प्राकृतिक खतरों जैसे हिमस्खलन और बर्फीले तूफानों के लिए कुख्यात है। इस क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक ठंड सैनिकों के लिए लगातार चुनौतियां पेश करती हैं।

सेना की बचाव टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं और लेह व उधमपुर से अतिरिक्त सहायता मंगाई गई। पांच घंटे के कठिन बचाव अभियान के बाद, तीनों शहीद जवानों के शव बरामद किए गए। सूत्रों के अनुसार, शहीद जवान महार रेजिमेंट के थे और गुजरात, उत्तर प्रदेश, और झारखंड के रहने वाले थे। एक सेना कैप्टन को भी बचा लिया गया, जिसे चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।

सियाचिन: दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र

सियाचिन ग्लेशियर, जो नियंत्रण रेखा के उत्तरी सिरे पर लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, दुनिया का सबसे ऊंचा और सबसे चुनौतीपूर्ण युद्धक्षेत्र माना जाता है। यह क्षेत्र भारत और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, और 1984 में ऑपरेशन मेघदूत के बाद से भारतीय सेना ने यहां अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी है। हालांकि, इस क्षेत्र की कठोर जलवायु और प्राकृतिक आपदाओं ने सैनिकों के लिए जोखिम को और बढ़ा दिया है।

आंकड़ों के अनुसार, 1984 से अब तक सियाचिन में मौसम की मार और हिमस्खलन जैसी घटनाओं में 1,000 से अधिक जवान शहीद हो चुके हैं। 2019 में हुए एक हिमस्खलन में चार सैनिक और दो पोर्टर मारे गए थे, जबकि 2022 में अरुणाचल प्रदेश के कामेंग सेक्टर में सात जवान शहीद हुए थे। इन घटनाओं ने सियाचिन और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को बार-बार उजागर किया है।

सेना का बचाव और सुरक्षा उपाय

भारतीय सेना ने हिमस्खलन जैसी आपदाओं से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं। 2022 में, सेना ने सियाचिन और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमस्खलन से बचाव के लिए एक स्वीडिश फर्म से 20 हिमस्खलन बचाव प्रणालियां खरीदी थीं। इसके बावजूद, इस क्षेत्र की अप्रत्याशित प्रकृति और चरम मौसम सैनिकों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है।

सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि शहीद जवानों के परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। इस हादसे ने एक बार फिर सियाचिन में तैनात सैनिकों की वीरता और बलिदान को रेखांकित किया है, जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

इस दुखद घटना ने देशभर में शोक की लहर पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर लोग शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर सियाचिन जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों के सामने आने वाली असाधारण चुनौतियों की याद दिलाता है।

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