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महाराष्ट्र: गरबा पर तिलक, रक्षा सूत्र और गौमूत्र छिड़काव अनिवार्य, सियासत गरमाई

महाराष्ट्र: गरबा पर तिलक, रक्षा सूत्र और गौमूत्र छिड़काव अनिवार्य, सियासत गरमाई

नवरात्रि की शुरुआत कल से हो रही है। और नवरात्रि के ठीक एक दिन पहले महाराष्ट्र में गरबा आयोजनों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने एक सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसने राज्य की सियासत को हिला दिया है। विहिप ने गरबा पंडालों में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति देने का फरमान सुनाया है।

प्रवेश से पहले आधार कार्ड की जांच, माथे पर तिलक लगाना, हाथों में रक्षा सूत्र बांधना, किसी हिंदू देवता की पूजा और सबसे विवादास्पद – सभी प्रतिभागियों पर गौमूत्र छिड़काव अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया है। विहिप का दावा है कि यह कदम गरबा को 'धार्मिक अनुष्ठान' के रूप में संरक्षित करने और 'लव जिहाद' जैसे मामलों को रोकने के लिए जरूरी है।

क्या हैं मुख्य निर्देश?

विहिप के विदर्भ महासचिव प्रशांत तित्रे ने शनिवार (20 सितंबर) को नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह एडवाइजरी जारी की। उन्होंने कहा, "गरबा मात्र नृत्य नहीं, बल्कि देवी को प्रसन्न करने का धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें गैर-हिंदुओं का प्रवेश 'परंपरा का अपमान' होगा।

  • प्रवेश जांच: एंट्री गेट पर आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र की सख्त जांच। केवल हिंदू पहचान वाले व्यक्तियों को अनुमति।
  • धार्मिक चिह्न: माथे पर तिलक लगाना, कलाई पर रक्षा सूत्र बांधना और गरबा शुरू होने से पहले किसी हिंदू देवता (जैसे मां दुर्गा) की पूजा अनिवार्य।
  • गौमूत्र छिड़काव: सभी प्रतिभागियों पर गौमूत्र का छिड़काव, जिसे विहिप 'शुद्धिकरण' का प्रतीक मानती है।
  • निगरानी: विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता गरबा पंडालों की राउंड-द-क्लॉक निगरानी करेंगे। उल्लंघन पर आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी।

तित्रे ने स्पष्ट किया कि यह फरमान नवरात्रि (22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक) के सभी गरबा आयोजनों पर लागू होगा। विहिप का तर्क है कि गौमूत्र हिंदू परंपरा में पवित्र माना जाता है और यह आयोजन को 'अशुद्ध' तत्वों से बचाएगा।

विपक्ष का हमला, भाजपा का बचाव

इस एडवाइजरी ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्षी दलों ने विहिप और संघ परिवार पर 'समाज में जहर घोलने' का आरोप लगाया है।

  • कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार: "वे धर्म की आग लगाकर समाज में दरार डालना चाहते हैं। यह महाराष्ट्र जैसे समावेशी राज्य को शोभा नहीं देता।"
  • शिवसेना (उद्धव) के संजय राउत: "सर्वधर्म समभाव की बातें तो छोड़िए, लेकिन यह जहर बोने का काम बंद होना चाहिए। गरबा सबका त्योहार है, न कि किसी एक का।"
  • शिवसेना (शिंदे गुट) के दीपक केसरकर: "गरबा प्रत्येक संस्था आयोजित करती है। सार्वजनिक टिप्पणी ठीक नहीं, लेकिन आयोजक तय करेंगे।"

दूसरी ओर, भाजपा ने विहिप के फरमान का अप्रत्यक्ष समर्थन किया। महाराष्ट्र के मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, "आयोजकों को पुलिस अनुमति के साथ प्रवेश शर्तें तय करने का पूर्ण अधिकार है। गरबा हिंदू आयोजन है, अन्य धर्मों के लोगों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।" भाजपा मीडिया प्रमुख नवनाथ बान ने भी कहा, "यह परंपरा की रक्षा का प्रयास है।"

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने सफाई देते हुए कहा, "मुस्लिम मूर्तिपूजा में विश्वास नहीं रखते। केवल वही लोग इसमें भाग लें जो परंपरा में विश्वास रखते हैं।"

समर्थन और विरोध की लहर

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है। हिंदू संगठनों ने विहिप की तारीफ की, जबकि उदारवादी समूहों और अल्पसंख्यक संगठनों ने इसे 'भेदभावपूर्ण' बताते हुए विरोध जताया। नागपुर में एक गरबा आयोजक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "गौमूत्र छिड़काव से कई लोग नाराज हो सकते हैं। हम परंपरा का सम्मान करेंगे, लेकिन विवाद से बचेंगे।"

महाराष्ट्र पुलिस ने स्पष्ट किया कि सभी गरबा आयोजन पुलिस अनुमति के अधीन होंगे और शांति भंग करने वाले किसी भी कदम पर कार्रवाई होगी।

गरबा का महत्व

गरबा गुजरात से उत्पन्न एक पारंपरिक लोकनृत्य है, जो नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना के रूप में खेला जाता है। 'गर्भ' शब्द से व्युत्पन्न, यह गर्भ में स्थित जीवन का प्रतीक है। महाराष्ट्र में भी यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इस साल विहिप का फरमान इसे सांप्रदायिक रंग दे रहा है।

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