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लखनऊ हादसे ने कानपुर के दो घर उजाड़े, दादी के कार्यक्रम में आने वाला बेटा क्यों नहीं लौटा?

लखनऊ हादसे ने कानपुर के दो घर उजाड़े, दादी के कार्यक्रम में आने वाला बेटा क्यों नहीं लौटा?

लखनऊ के अलीगंज हादसे ने कानपुर के दो परिवारों की दुनिया बदल दी। गोविंदनगर के संयम विज और बर्रा के सूरजभान एनिमेशन और थ्रीडी आर्ट की दुनिया में अपना नाम बनाने निकले थे। दोनों युवा अपने घरों की उम्मीद थे। लेकिन हादसे के बाद अब एक घर में संयम का खाली कमरा है और दूसरे घर में सूरजभान की तस्वीर। मां की आंखें दरवाजे पर टिकी हैं लेकिन बेटे की आवाज अब कभी नहीं आएगी।

संयम का घर आने का वादा

गोविंदनगर 11 ब्लॉक के रहने वाले करीब 28 साल के संयम विज पिछले तीन साल से लखनऊ के एक एनिमेशन स्टूडियो में थ्रीडी आर्टिस्ट थे। परिवार के अनुसार वह अक्सर शुक्रवार को कानपुर आते और सोमवार को वापस लखनऊ चले जाते थे। इस बार घर में उनका इंतजार और भी ज्यादा था। उनकी दादी का निधन हुआ था और मंगलवार को उनका सत्रहवां होना था। संयम ने घर आने की बात कही थी लेकिन हादसे ने वह वादा हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया।

मां ने बेटे के सपनों को संभाला

संयम के पिता का निधन बचपन में ही हो गया था। मां ने बेटे को पढ़ाया और उसके सपनों को पूरा करने के लिए हर मुश्किल का सामना किया। जब संयम को नौकरी मिली तो परिवार को लगा कि अब जिंदगी धीरे-धीरे संभल जाएगी। घर में उसके भविष्य और शादी की बातें भी होने लगी थीं। लेकिन एक खबर ने सब कुछ बदल दिया। देर रात तक घर के बाहर रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग जुटे रहे। हर किसी की आंख में एक ही सवाल था कि मेहनत करके घर संभालने निकला बेटा आखिर वापस क्यों नहीं आया।

सूरजभान था घर का सहारा

बर्रा सात के करीब 22 साल के सूरजभान भी उसी स्टूडियो में थ्रीडी आर्टिस्ट के तौर पर काम करते थे। वह संयम को जानते थे और दोनों डिजिटल दुनिया में आगे बढ़ना चाहते थे। सूरजभान के पिता का पहले ही निधन हो चुका था। घर की जिम्मेदारी उनकी मां मीरा और छोटे भाई सम्राट के साथ सूरजभान के कंधों पर थी। उनकी नौकरी से घर का खर्च चलता था। परिवार के लिए वह सिर्फ बेटा नहीं बल्कि पूरे घर का सहारा थे।

मां को देर तक नहीं बताई खबर

परिवार के मुताबिक सूरजभान रविवार को ही लखनऊ गए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि वह फिर घर नहीं लौटेंगे। उनका छोटा भाई सम्राट उस समय ऋषिकेश में था। हादसे की खबर मिलते ही वह लखनऊ के लिए निकल पड़ा। घरवालों ने सूरजभान की मां को देर रात तक पूरी बात नहीं बताई। उन्हें डर था कि बेटे की खबर सुनकर वह टूट जाएंगी। यह दर्द सिर्फ एक परिवार का नहीं है बल्कि हर उस मां-बाप का है जो बच्चों को पढ़ाई या नौकरी के लिए दूसरे शहर भेजते हैं।

सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

इस हादसे के बाद परिवारों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संयम के परिजनों का आरोप है कि कॉम्प्लेक्स का सेंसर वाला गेट सही समय पर काम नहीं कर पाया। जांच में हादसे की वजह और जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आएगी। लेकिन कानपुर के गोविंदनगर और बर्रा में फिलहाल सिर्फ मातम है। संयम और सूरजभान करियर बनाने निकले थे लेकिन घर लौटकर मां से यह नहीं कह सके कि अब सब ठीक हो जाएगा।

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