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लखनऊ हादसे के बाद बड़ा सवाल, क्या आपकी बिल्डिंग सच में सुरक्षित है?

लखनऊ हादसे के बाद बड़ा सवाल, क्या आपकी बिल्डिंग सच में सुरक्षित है?

लखनऊ में हुए दर्दनाक हादसे ने सिर्फ उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया है। किसी के लिए वह ऑफिस था, किसी के लिए कोचिंग सेंटर और किसी के लिए रोजी रोटी का ठिकाना। लेकिन एक पल में वही जगह खतरे में बदल गई। अब सवाल यह है कि जिस बिल्डिंग में हम रोज जाते हैं, क्या वहां आपात स्थिति में बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता है? क्या वहां सुरक्षा के इंतजाम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं या सच में काम करते हैं?

ऊंची इमारतें और बड़े खतरे

दिल्ली, नोएडा, लखनऊ समेत कई शहरों में तेजी से बहुमंजिला इमारतें बन रही हैं। इनमें ऑफिस, दुकानें, कोचिंग सेंटर, हॉस्टल और क्लीनिक चल रहे हैं। लेकिन इमारत ऊंची होने से ज्यादा जरूरी उसका सुरक्षित होना है। नेशनल बिल्डिंग कोड के मुताबिक 15 मीटर से ज्यादा ऊंची इमारतों के लिए खास सुरक्षा नियम बनाए गए हैं। इन नियमों का मकसद यह है कि आग, धुआं या किसी दूसरी आपात स्थिति में लोग बिना भगदड़ के सुरक्षित बाहर निकल सकें।

दो सीढ़ियां क्यों हैं जरूरी

किसी भी बड़ी बिल्डिंग में दो अलग सीढ़ियां होना बहुत जरूरी माना जाता है। अगर एक रास्ते में धुआं भर जाए या आग फैल जाए तो दूसरा रास्ता लोगों की जान बचा सकता है। कई इमारतों में सीढ़ियों के पास सामान रख दिया जाता है या रास्ते को संकरा कर दिया जाता है। यह छोटी गलती नहीं है। आप जिस बिल्डिंग में रहते या काम करते हैं वहां जरूर देखें कि इमरजेंसी एग्जिट खुला है या नहीं और उस तक पहुंचने का रास्ता साफ है या नहीं।

रिफ्यूज एरिया और फायर लिफ्ट

बहुमंजिला इमारतों में रिफ्यूज एरिया भी होना चाहिए। यह ऐसी सुरक्षित जगह होती है जहां लोग कुछ समय के लिए रुक सकते हैं और बचाव टीम का इंतजार कर सकते हैं। इसके साथ फायर लिफ्ट की भी जरूरत होती है। यह आम लिफ्ट से अलग होती है और राहत बचाव दल के इस्तेमाल के लिए बनाई जाती है। लेकिन आग लगने पर आम लोगों को लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि बिजली जाने पर लोग अंदर फंस सकते हैं।

बिजली की जांच सबसे जरूरी

कई हादसों में खराब वायरिंग, ओवरलोडिंग और पुराने बिजली उपकरण बड़ी वजह बनते हैं। इसलिए बिल्डिंग में इलेक्ट्रिकल सेफ्टी की नियमित जांच जरूरी है। पानी का पर्याप्त स्टोरेज, फायर अलार्म, फायर एक्सटिंग्विशर और स्प्रिंकलर सिस्टम भी काम करने की स्थिति में होने चाहिए। नया घर लेने या ऑफिस किराए पर लेने से पहले पूछें कि आखिरी बार फायर ऑडिट कब हुआ था और क्या वहां आपातकालीन अभ्यास कराया जाता है।

आग लगने पर क्या करें

अगर आग लगे तो घबराएं नहीं और तुरंत आसपास के लोगों को सतर्क करें। अलार्म बजाएं और 101 नंबर पर फायर ब्रिगेड को सूचना दें। बाहर निकलने के लिए लिफ्ट नहीं बल्कि सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। धुआं ज्यादा हो तो नाक और मुंह को कपड़े से ढक लें और नीचे झुककर चलें। बच्चों, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को पहले सुरक्षित जगह पहुंचाने की कोशिश करें। सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ ऊंची बिल्डिंग नहीं बल्कि सुरक्षित बिल्डिंग ही असली विकास की पहचान होती है।

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