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लखनऊ एक्सप्रेस-वे हादसा: बस में आग लगने से अफरा-तफरी, 70 लोगों की जान बाल-बाल बची

लखनऊ एक्सप्रेस-वे हादसा: बस में आग लगने से अफरा-तफरी, 70 लोगों की जान बाल-बाल बची

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निकट आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर रविवार तड़के एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। दिल्ली से गोंडा जा रही एक डबल डेकर एसी बस का पिछला टायर तेज रफ्तार में फट गया, जिससे कुछ ही पलों में वाहन आग का गोला बन गया। बस में सवार करीब 70 यात्रियों की जान पर बन आई, लेकिन ड्राइवर की फुर्ती और यात्रियों के साहस से सभी बाल-बाल बच गए। आग इतनी भयानक थी कि बस पूरी तरह जलकर राख हो गई, जबकि आसपास के इलाके में धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया। यह घटना एक्सप्रेसवे पर बढ़ते हादसों की कड़ी में एक और उदाहरण है, जो सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है।

घटना रविवार सुबह करीब 4:30 बजे काकौरी थाना क्षेत्र के टोल प्लाजा के पास हुई। बस (पंजीकरण संख्या BR28P6333) उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की नहीं, बल्कि एक निजी ट्रैवल कंपनी की थी, जो दिल्ली के आनंद विहार से गोंडा के लिए नियमित रूप से संचालित होती है। बस में ज्यादातर यात्री बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के निवासी थे, जो छठ पूजा के अवसर पर अपने घर लौट रहे थे। तेज रफ्तार में चल रही बस की गति 80-90 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है। अचानक एक जोरदार धमाके के साथ पिछला टायर फट गया, जिससे बस का संतुलन बिगड़ गया। ड्राइवर ने तुरंत ब्रेक लगाए और वाहन को सड़क के किनारे रोका। लेकिन तब तक इंजन के नीचे से काला धुआं निकलने लगा, जो कुछ ही सेकंडों में लपटों में बदल गया। यात्रियों के अनुसार, आग ने इतनी तेजी से फैलाव पकड़ा कि बस का पिछला हिस्सा पहले ही जलने लगा, और फिर पूरा वाहन धू-धू से जल उठा।

ड्राइवर राम सिंह (नाम परिवर्तित) ने हादसे के बाद अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों को बाहर निकाला। उन्होंने बताया, "मैंने टायर फटने की आवाज सुनी और तुरंत ब्रेक मार दिया। बाहर उतरकर देखा तो इंजन से आग की लपटें उठ रही थीं। बस में दो फायर एक्सटिंग्विशर थे, मैंने दोनों इस्तेमाल किए, लेकिन आग पर काबू न पाया। फिर मैं टोल प्लाजा की ओर दौड़ा और वहां से मदद मांगी।" ड्राइवर के इस कदम से यात्रियों को कुछ ही मिनटों में बाहर निकलने का मौका मिला। अधिकांश यात्री मुख्य दरवाजे और खिड़कियों से कूदकर बाहर आए। एक यात्री, मोहन लाल (बिहार के निवासी), ने बताया, "हम सब सो रहे थे। अचानक धमाका हुआ, तो लगा बस पलट जाएगी। धुआं फैलते ही घुटन हुई, लेकिन ड्राइवर भैया चिल्लाए कि जल्दी बाहर निकलो। मैंने अपना सामान तक नहीं उठाया। छठी मइया ने बचाया, वरना सब जल जाते।" इसी तरह, एक अन्य यात्री रीता देवी ने कहा, "बच्चे डर से रो रहे थे। आग का गोला बन चुकी बस को देखकर पैर कांप गए। गनीमत हुई कि कोई हताहत नहीं हुआ।"

आसपास के ग्रामीणों और अन्य वाहनों के चालकों ने भी फौरन मदद की। टोल प्लाजा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। लेकिन आग बेकाबू हो चुकी थी। सूचना मिलते ही चौक, आलमबाग और सरोजिनी नगर फायर स्टेशनों से तीन फायर टेंडर रवाना हुए। फायर स्टेशन अधिकारी (एफएसओ) पुष्कर कुमार ने बताया, "सुबह 4:45 बजे हमें सूचना मिली। चीफ फायर ऑफिसर के निर्देश पर वाटर टेंडर तुरंत भेजा गया। लेकिन आग इतनी तेज थी कि एक घंटे की मशक्कत के बाद ही काबू पाया जा सके। तब तक बस की पूरी बॉडी जल चुकी थी।" फायर ब्रिगेड की टीम ने करीब एक घंटे तक पानी की बौछारें डालीं, लेकिन वाहन का अधिकांश हिस्सा राख हो चुका था। सौभाग्य से, आग का असर सड़क पर अन्य वाहनों तक नहीं पहुंचा।

पुलिस ने भी त्वरित कार्रवाई की। काकौरी थाने के इंस्पेक्टर सतीश राठौर ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी। उन्होंने कहा, "प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से लगता है कि टायर फटने से शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसकी वजह से आग लगी। बस की फिटनेस और रखरखाव की जांच की जा रही है। निजी ट्रैवल कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।" पुलिस ने यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन उपलब्ध कराया, ताकि वे अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। यात्रियों ने अपना सामान खो दिया, लेकिन जान बचने पर राहत की सांस ली। एक यात्री ने शिकायत की कि टोल प्लाजा पर कोई अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण नहीं थे, जिससे शुरुआती बचाव में देरी हुई।

यह हादसा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा मानकों की पोल खोलता है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जो 2021 में चालू हुआ, तेज गति और ट्रैफिक के कारण हादसों का शिकार होता रहा है। पिछले एक साल में यहां दर्जनों दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें टायर फटना और इंजन फेलियर प्रमुख कारण रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने टायरों का इस्तेमाल और अधिक लोड निजी बसों की आम समस्या है। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "निजी बसों की नियमित जांच जरूरी है। छठ जैसे त्योहारों में यात्रा बढ़ने से जोखिम और अधिक हो जाता है।" विभाग ने अब सभी एक्सप्रेसवे बसों की विशेष जांच के आदेश जारी किए हैं।

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