लद्दाख, भारत का वह दुर्गम इलाका जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांतिपूर्ण जीवनशैली के लिए जाना जाता है, इन दिनों हिंसक प्रदर्शनों की चपेट में है। जलवायु कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक के नेतृत्व में शुरू हुआ एक शांतिपूर्ण आंदोलन अब हिंसा की भेंट चढ़ चुका है, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए हैं। लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया है, और केंद्र सरकार ने वांगचुक पर भड़काऊ बयानों का आरोप लगाया है। सोनम वांगचुक कौन हैं, लद्दाख की मांगें क्या हैं, और यह आंदोलन कैसे हिंसक हो गया।
सोनम वांगचुक लद्दाख के एक प्रमुख इंजीनियर, नवोन्मेषक और शिक्षा सुधारक हैं। उनका जन्म लद्दाख में हुआ और उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से वे शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। 1988 में उन्होंने स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की, जो लद्दाखी छात्रों को वैकल्पिक शिक्षा प्रदान करती है।
वांगचुक को 'आइस स्टूपा' प्रोजेक्ट के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, जो जल संरक्षण की एक अनोखी तकनीक है। यह कृत्रिम ग्लेशियर बनाने की विधि है, जो सर्दियों में बर्फ को संरक्षित कर गर्मियों में पानी की कमी को दूर करती है। वे शिक्षा सुधारों के लिए भी जाने जाते हैं और बॉलीवुड फिल्म '3 इडियट्स' में आमिर खान के किरदार फुंसुख वांगडू का प्रेरणा स्रोत भी वे ही हैं। हाल के वर्षों में वे पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हो गए हैं, खासकर लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर। वे नोबेल वीक डायलॉग जैसे मंचों पर भी बोल चुके हैं।
लद्दाख की समस्या
लद्दाख की मौजूदा अशांति की जड़ें 2019 में हैं, जब अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख – में विभाजित किया गया। शुरू में लद्दाखवासियों ने इस फैसले का स्वागत किया, लेकिन जल्द ही असंतोष उभरा। मुख्य मांगें हैं:
- पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने से स्थानीय लोगों को लगता है कि उनके पास अपनी जमीन, नौकरियां और संसाधनों पर नियंत्रण नहीं है। बाहरी लोग बड़ी कंपनियां लाकर स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- छठी अनुसूची में शामिल करना: यह संवैधानिक प्रावधान आदिवासी क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा प्रदान करता है, जैसे स्थानीय परिषदों को कानून बनाने का अधिकार। लद्दाख के लोग डरते हैं कि बिना इसकी जमीनें कॉरपोरेट हाथों में चली जाएंगी और उनकी सांस्कृतिक पहचान मिट जाएगी।
- रोजगार और पर्यावरण सुरक्षा: बेरोजगारी बढ़ रही है, और जलवायु परिवर्तन से पानी की कमी जैसी समस्याएं गंभीर हैं।
पिछले तीन वर्षों में वांगचुक ने पांच बार अनशन किया है। 2024 में उन्होंने चेतावनी दी थी कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमी और बेरोजगारी से स्थिति विस्फोटक हो सकती है।
वर्तमान आंदोलन
10 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक ने लेह में अनशन शुरू किया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। यह आंदोलन शांतिपूर्ण था और 'युवा प्रदर्शन' के रूप में प्रचारित किया गया। मांगें वही थीं – राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची। लेकिन 24 सितंबर को प्रदर्शन हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा मुख्यालय और मुख्य चुनाव आयुक्त कार्यालय में आग लगा दी, पुलिस वाहनों को क्षतिग्रस्त किया। झड़पों में चार लोगों की मौत हुई, 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, और लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया।
केंद्र सरकार ने वांगचुक पर आरोप लगाया कि उनके बयानों ने भीड़ को भड़काया। सरकार के मुताबिक, वांगचुक ने 'अरब स्प्रिंग' जैसे आंदोलनों और नेपाल के 'जनरेशन Z' प्रदर्शनों का जिक्र कर लोगों को उकसाया। गृह मंत्रालय ने कहा कि वार्ता चल रही है, और हाई-पावर्ड कमिटी की अगली बैठक 6 अक्टूबर को है। वहीं, वांगचुक ने हिंसा की निंदा की और अपना अनशन खत्म कर दिया, लेकिन कहा कि आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह हिंसा उनके आंदोलन के लिए झटका है।
लद्दाख हिंसा में दो महिलाओं की मौत: अफवाह या सच?
लद्दाख में हुई हिंसा में कुल चार लोगों की मौत हुई है, लेकिन किसी भी विश्वसनीय स्रोत में दो महिलाओं की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स में मरने वालों को "युवा" या "लोग" के रूप में वर्णित किया गया है, लेकिन लिंग का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। एक रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों में "स्कूल गर्ल्स, कॉलेज स्टूडेंट्स और मॉन्क्स" का जिक्र है, लेकिन मौतों के बारे में कोई विवरण नहीं।
यह दावा सोशल मीडिया या अनौपचारिक स्रोतों से फैला हो सकता है, लेकिन मुख्यधारा की मीडिया और सरकारी बयानों में इसकी पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए, इसे अफवाह माना जा रहा है?
क्या है विवाद की वजह?
यह आंदोलन 'जनरेशन Z' युवाओं की नाराजगी से जुड़ा है, जो बेरोजगारी और स्थानीय अधिकारों की कमी से त्रस्त हैं। कुछ लोग इसे कांग्रेस से जुड़े नेताओं से जोड़ते हैं, जबकि अन्य इसे गहरी उपेक्षा का नतीजा मानते हैं। लद्दाख चीन और पाकिस्तान की सीमा से लगा होने के कारण रणनीतिक रूप से संवेदनशील है, इसलिए यहां अशांति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
आगे क्या?
वांगचुक ने कहा है कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई। सरकार और स्थानीय संगठनों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन हिंसा ने स्थिति को जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शांतिपूर्ण समाधान के लिए केंद्र को लद्दाख की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, वरना असंतोष बढ़ सकता है।



