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कानपुर: DM से भिड़ने वाला CMO सस्पेंड, जानें क्या है आरोप ?

कानपुर: DM से भिड़ने वाला CMO सस्पेंड, जानें क्या है आरोप ?

कानपुर में चल रहे DM Vs CMO विवाद में आखिरकार मुख्य चिकित्साधिकारी CMO डॉ हरिदत्त नेगी को कार्यालय महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं से सम्बद्ध किया गया। उनकी जगह श्रावस्ती के डॉ. उदयनाथ को कानपुर का नया अपर मुख्य चिकित्साधिकारी CMO बनाया गया है उन्हे तत्काल प्रभाव से चार्ज संभालने का आदेश है।

आपको बता दें जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य चिकित्साधिकारी CMO डॉ. हरिदत्त नेमी के बीच लम्बे समय से चले आ रहे विवाद का पाक्षेप आखिर CMO के निलम्बन के साथ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद गुरुवार को उनको सस्पेंड कर दिया गया। उनकी जगह श्रावस्ती में तैनात डॉ उदय नाथ को कानपुर का नया सीएमओ नियुक्त किया गया है।

CMO पर लापरवाही के आरोप?

विवाद की शुरुआत फरवरी 2025 में हुई, जब DM जितेंद्र प्रताप सिंह ने CMO कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सीएमओ (CMO) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए। इसके बाद डीएम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) का ताबड़तोड़ दौरा किया, जहां दस्तावेजों में अनियमितताएं, चिकित्सा सेवाओं में कमी और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई। डीएम ने इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की और शासन को उनको हटाने के लिए पत्र भेज दिया। विवाद तब और भड़क गया जब एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई, जिसमें कथित तौर पर सीएमओ, डीएम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते सुने गए।

डीएम ने इस घटना के बाद एक समीक्षा बैठक में CMO को सभागार से बाहर निकाल दिया, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया जमकर वायरल हुआ। इस एक्शन के बाद डीएम और सीएमओ के बीच खटास शुरू हुई। इससे पहले डीएम लगातार सीएचसी और पीएचसी पहुंचकर कमियां उजागर कर रहे थे। इस मामले ने तब और तूल पकड़ा, जब डीएम के कहने पर भी सीएमओ ने लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों पर कोई एक्शन नहीं लिया। फिर इस मामले मे भी बीजेपी में भी दो फाड़ हुई। यानि की दो खेमों मे बंट गई। और राजनीती शुरू हो गई।

विवाद में कूदे विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, MLC अरुण पाठक और MLA सुरेंद्र मैथानी ने CMO के समर्थन डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को पत्र लिखकर उनके न केवल उनको अच्छा अधिकारी बताया था बल्कि जनहित में तबादला न करने का अनुरोध किया था। इसे डिप्टी सीएम के प्रति समर्थन के तौर पर भी देखा गया। दूसरी तरफ बीजेपी के बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा, विधायक महेश त्रिवेदी और पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी ने डीएम का पक्ष लेते हुए सीएमओ पर भ्रष्टाचार और निजी अस्पतालों के साथ सांठगांठ के आरोप लगाए। सांगा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ को पत्र लिखकर सीएमओ के तबादले की मांग की थी। डीएम और सीएमओ के बीच चल रहा विवाद सीएम योगी तक पहुंच गया है। दोनों अधिकारियों की फाइलें CMO ऑफिस तलब हुई हैं। इसके बाद गुरुवार को सीएमओ का सस्पेंड करने का शासनादेश जारी हो गया। सीएम ने अधिकारियों के विवाद और उसमें भाजपा नेताओं के कूदने को पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना और तत्काल इसका पटाक्षेप करने का निर्णय लिया।

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