कानपुर में ऑपरेशन सिंदूर कप में रविवार को सांसद 11 और सेना 11 के बीच ग्रीनपार्क स्टेडियम में मैच खेला गया। बारिश के कारण देरी से शुरू हुए इस मैच को 12 ओवर का कर दिया गया, जिसमें सेना इलेवन ने सांसद इलेवन को 9 विकेट से हरा दिया।
सांसद इलेवन की ओर से दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने कप्तानी की तो वहीं सेना एकादश की ओर से ब्रिगेडियर सबरुल हसन ने कप्तानी का दायित्व निभाया। कानपुर के लोकप्रिय सांसद रमेश अवस्थी के कुशल नेतृत्व में सांसद-11 टीम ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया था। जिसमें टीम ने 12 ओवर में 8 विकेट खोकर 95 रन बनाए। दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने सर्वाधिक 30 रन की पारी खेली, जबकि कानपुर के भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने 17 रन का योगदान दिया।
दूसरी ओर रनों का पीछा करते हुए सेना इलेवन ने मात्र एक विकेट के नुकसान पर 96 रनों का टारगेट बड़े आसानी से हासिल कर लिया। सेना इलेवन की ओर से कानपुर के पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने लगाई फिफ्टी, उन्होने 36 गेंदों पर नाबाद 50 रन बनाए, जिसमें 7 चौके और 1 छक्का शामिल था। अभिजीत सिंह सांगा की गेंद पर अखिल ने चौका लगाकर सेना इलेवन को 9 विकेट से शानदार जीत दिलाई। सेना इलेवन के गेंदबाज मनीष कुमार सोनकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट चटकाए।
मैन ऑफ द मैच अखिल कुमार (पुलिस कमिश्नर, कानपुर), बेस्ट बैटर- मनोज तिवारी (सांसद, दिल्ली), बेस्ट बॉलर- मनीष कुमार सोनकर (एडीसीपी), बेस्ट ऑलराउंडर- गौरांग राठी (जिलाधिकारी, उन्नाव) को चुना गया।
कानपुर ग्रीनपार्क स्टेडियम में खेले गए मैच में बॉलीवुड अभिनेत्री सोनल चौहान की मौजूदगी ने समारोह में चार चांद लगाए, जबकि कई सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजक सांसद रमेश अवस्थी ने विजेता सेना इलेवन को बधाई देते हुए कहा, “भारतीय सेना की जीत तय थी। चाहे युद्ध का मैदान हो या खेल का, सेना का शौर्य, समर्पण और अजेयता हर क्षेत्र में बेमिसाल है। इस हार में हमें उतनी ही खुशी है, जितनी जीत में होती। अवस्थी ने बताया, “इस मैत्री मैच का मकसद ऑपरेशन सिंदूर की विजय गाथा को खेल के जरिए हर देशवासी तक पहुंचाना है। यह आयोजन भारतीय सेना के अद्वितीय पराक्रम, साहस और बलिदान को श्रद्धांजलि देने का एक छोटा सा प्रयास है। वहीं दर्शकों ने भी इस आयोजन को लेकर कहा कि सांसद रमेश अवस्थी के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर कप न केवल एक क्रिकेट मुकाबला रहा, बल्कि भारतीय सेना के शौर्य, बलिदान और देशप्रेम को सम्मानित करने का एक शानदार मंच साबित हुआ। यह आयोजन कानपुर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया।



