देश की संसद से जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल पास हो गया है और गजट नोटिफिकेशन के बाद यह कानून बन जाएगा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक यह कदम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है और इससे प्रशासनिक बोझ भी कम होगा।
हजार अपराध अब नहीं रहेंगे अपराध
इस बिल के तहत करीब 80 केंद्रीय कानूनों में संशोधन किया गया है और लगभग 1000 अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। कई मामलों में जेल की सजा हटाकर केवल जुर्माना रखा गया है, जबकि कुछ मामलों में पहली बार गलती पर सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ने का प्रावधान किया गया है।
ड्राइविंग लाइसेंस और रोजमर्रा के नियम आसान
अब ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता खत्म होने के बाद 30 दिन तक उसे वैध माना जाएगा। पहले मामूली देरी भी अपराध मानी जाती थी, लेकिन अब इसे आसान कर दिया गया है। इसी तरह जन्म और मृत्यु की सूचना न देने जैसे मामलों को भी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।
जेल की जगह अब जुर्माना होगा सजा
राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने, बिजली नियमों का उल्लंघन करने या कॉस्मेटिक्स नियम तोड़ने जैसे कई मामलों में अब जेल नहीं होगी। इन मामलों में केवल जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि छोटे अपराधों के लिए जेल की सजा जरूरी नहीं है और इससे सिस्टम पर दबाव भी बढ़ता है।
पहली गलती पर मिलेगा सुधार का मौका
नए कानून में सुधार की सोच को भी शामिल किया गया है। अगर कोई पहली बार नियम तोड़ता है तो उसे सलाह दी जाएगी, दूसरी बार चेतावनी मिलेगी और उसके बाद ही जुर्माना लगाया जाएगा। इससे लोगों को अपनी गलती सुधारने का मौका मिलेगा और अनावश्यक सजा से बचा जा सकेगा।
जुर्माने की रकम भी होगी तय नियम से
इस बिल में यह भी तय किया गया है कि जुर्माने की राशि अपराध की गंभीरता के अनुसार होगी। साथ ही हर तीन साल में जुर्माने की न्यूनतम राशि को 10 प्रतिशत बढ़ाया जाएगा। इससे कानून समय के साथ अपडेट होते रहेंगे और उनका असर भी बना रहेगा
