पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद, 1 सितंबर 2025 को संसद भवन के पास चर्च रोड स्थित उपराष्ट्रपति के आधिकारिक आवास को खाली कर दिया। जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था।
रिपोर्ट के मुताबिक जगदीप धनखड़ 42 दिन के बाद उपराष्ट्रपति आवास छोड़ने के बाद छतरपुर फार्महाउस में शिफ्ट हो चुके है। यह फार्महाउस छतरपुर के गदईपुर क्षेत्र में स्थित है, और धनखड़ के इस कदम ने राजनीतिक और मीडिया हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है।
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था, जिसने देश की राजनीति में हलचल मचा दी। उनका कार्यकाल अगस्त 2027 तक था, लेकिन उन्होंने इसे समय से पहले छोड़ने का फैसला किया। इस्तीफे की घोषणा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हुई, जब धनखड़ ने राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्यवाही का संचालन किया और फिर चुपचाप सदन से चले गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया।
इस्तीफे के बाद से धनखड़ सार्वजनिक जीवन से लगभग गायब रहे। सूत्रों के अनुसार, वह इस दौरान उपराष्ट्रपति आवास में ही रह रहे थे, जहां वे अपने परिवार के साथ समय बिता रहे थे और नियमित रूप से योग और टेबल टेनिस का अभ्यास कर रहे थे। उनके इस गायब होने ने विपक्षी दलों को सवाल उठाने का मौका दिया, जिनमें से कुछ ने दावा किया कि उनके इस्तीफे के पीछे राजनीतिक दबाव हो सकता है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके इस्तीफे की "असली वजह" पर सवाल उठाए, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा पूरी तरह से स्वास्थ्य कारणों से था।
छतरपुर में नया ठिकाना
1 सितंबर 2025 को, धनखड़ ने उपराष्ट्रपति आवास छोड़कर छतरपुर के गदईपुर डीएलएफ फार्म्स में अभय चौटाला के फार्महाउस में स्थानांतरण किया। यह अस्थायी व्यवस्था तब तक के लिए है, जब तक उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में हकदार टाइप-8 बंगला आवंटित नहीं हो जाता। सूत्रों के अनुसार, टाइप-8 बंगले की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था में कम से कम तीन महीने लग सकते हैं, जिसके कारण धनखड़ ने निजी आवास में जाने का फैसला किया।
अभय चौटाला ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "हमारे परिवार और धनखड़ के बीच 40 साल पुराना संबंध है। मैंने उन्हें अपने फार्महाउस में रहने की पेशकश की थी, और उन्होंने इसे स्वीकार किया।" धनखड़ का सामान पहले ही फार्महाउस में स्थानांतरित कर दिया गया था, और उनके सरकारी आवास का घरेलू सामान एक फ्लैट में रखा गया है।
पेंशन के लिए आवेदन
उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद, धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा में पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए आवेदन किया है। वे 1993 से 1998 तक किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रहे थे और जुलाई 2019 तक पेंशन प्राप्त करते थे, जो उनके पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बनने के बाद रोक दी गई थी। राजस्थान विधानसभा सचिवालय ने उनके आवेदन पर प्रक्रिया शुरू कर दी है, और नियमों के अनुसार, 74 वर्षीय धनखड़ को लगभग 42,000 रुपये मासिक पेंशन मिलने की संभावना है।
सार्वजनिक उपस्थिति और अटकलें
1 सितंबर को धनखड़ पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए, जब वे धौला कुआं स्थित आर्मी अस्पताल में दंत चिकित्सक से मिलने गए। सूत्रों के अनुसार, वह पिछले एक महीने से उपराष्ट्रपति आवास में ही थे और अपने रिश्तेदारों व दोस्तों से मिल रहे थे। उनके इस कदम ने विपक्ष के उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि उन्हें "नजरबंद" किया गया था।
हालांकि, उनके इस्तीफे को लेकर अटकलें अब भी जारी हैं। कुछ विपक्षी नेताओं, जैसे कपिल सिब्बल और राहुल गांधी, ने सुझाव दिया कि उनका इस्तीफा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इस दावे का कोई आधिकारिक पुष्टिकरण नहीं हुआ है।
उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 9 सितंबर 2025 को निर्धारित है, जिसमें एनडीए के उम्मीदवार महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी मैदान में हैं। धनखड़ के नए ठिकाने और पेंशन आवेदन ने उनकी गतिविधियों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है, और अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या वे भविष्य में सार्वजनिक या राजनीतिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।



