आईटीआर फाइलिंग का सीजन शुरू हो चुका है और ऐसे में लाखों नौकरीपेशा लोगों के मन में टैक्स रिफंड को लेकर सवाल हैं। कई बार सालभर के दौरान सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड या दूसरी आय पर जितना टैक्स कटता है, वह वास्तविक टैक्स देनदारी से ज्यादा होता है। ऐसी स्थिति में आयकर विभाग अतिरिक्त रकम वापस करता है। यदि आपकी कुल आय टैक्स छूट सीमा से कम है और फिर भी टीडीएस कट गया है, तब भी आप पूरा पैसा वापस पाने के हकदार होते हैं। इसके लिए समय पर आईटीआर दाखिल करना जरूरी होता है।
फॉर्म 26AS जरूर करें चेक
टीडीएस रिफंड पाने की प्रक्रिया फॉर्म 26AS से शुरू होती है। यह दस्तावेज आपके पैन से जुड़ा होता है और इसमें पूरे साल कटे टैक्स की जानकारी दर्ज रहती है। आईटीआर भरने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आपकी सैलरी, बैंक ब्याज और अन्य आय की जानकारी फॉर्म 26AS में दिख रही जानकारी से मेल खाती हो। यदि कटा हुआ टीडीएस आपकी देनदारी से ज्यादा है तो सिस्टम स्वतः रिफंड की राशि की गणना कर देता है।
आईटीआर के बाद ई-वेरिफिकेशन जरूरी
केवल आईटीआर फाइल करना ही काफी नहीं होता। रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन भी करना अनिवार्य है। आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या अन्य माध्यमों से यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। ई-वेरिफिकेशन नहीं होने पर आयकर विभाग रिटर्न को प्रोसेस नहीं करता और रिफंड भी जारी नहीं होता। इसलिए आईटीआर भरने के तुरंत बाद यह कदम जरूर पूरा करना चाहिए।
रिफंड स्टेटस ऐसे करें चेक
ई-वेरिफिकेशन के बाद सामान्य तौर पर 4 से 5 सप्ताह के भीतर रिफंड बैंक खाते में भेज दिया जाता है। रिफंड की स्थिति देखने के लिए आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। वहां ‘ई-फाइल’, ‘इनकम टैक्स रिटर्न’ और ‘व्यू फाइल्ड रिटर्न्स’ विकल्प के जरिए संबंधित असेसमेंट ईयर चुनकर स्टेटस देखा जा सकता है। यहां ‘रिफंड इश्यूड’, ‘रिफंड फेल्ड’ या ‘रिफंड एडजस्टेड’ जैसी जानकारी दिखाई देती है।
इन गलतियों से अटक सकता है पैसा
कई बार छोटी गलतियां रिफंड में देरी का कारण बन जाती हैं। पैन और आधार लिंक न होना, बैंक खाते का प्री-वैलिडेट न होना, नाम की स्पेलिंग में अंतर, गलत आईएफएससी कोड या बंद बैंक खाते की जानकारी देना सबसे आम कारण हैं। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी बैंक डिटेल्स और व्यक्तिगत जानकारी को ध्यान से जांच लेना चाहिए।
सीधे खाते में आता है रिफंड
विशेषज्ञों के अनुसार सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड, प्रोफेशनल फीस, कमीशन, ब्रोकरेज या अन्य आय पर कटा अतिरिक्त टीडीएस वापस पाने का सबसे आसान तरीका समय पर सही आईटीआर दाखिल करना है। यदि सभी दस्तावेज सही हैं और ई-वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है, तो आयकर विभाग अतिरिक्त टैक्स की रकम सीधे आपके बैंक खाते में भेज देता है। ऐसे में थोड़ी सावधानी आपको आपका पूरा पैसा वापस दिला सकती है।
