पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेजी से उभरे चेहरों में सयानी घोष का नाम प्रमुख माना जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मनोरंजन जगत से की थी और कम उम्र में ही बंगाली फिल्मों व धारावाहिकों के जरिए लोकप्रियता हासिल कर ली थी। अभिनय के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता भी बढ़ी, जिससे उन्हें युवाओं के बीच पहचान मिली। इसी लोकप्रियता को देखते हुए 2021 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और तृणमूल कांग्रेस से जुड़ गईं। राजनीति में आने के बाद उन्होंने बहुत कम समय में खुद को पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल कर लिया।
ममता की करीबी बनकर बढ़ा कद
तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद सयानी घोष ने तेजी से संगठन में अपनी जगह बनाई। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाया गया। चुनाव में जीत नहीं मिली, लेकिन पार्टी नेतृत्व का भरोसा उन पर लगातार बढ़ता गया। बाद में उन्हें युवा इकाई की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी के कार्यक्रमों, आंदोलनों और चुनावी अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं में उनका नाम लिया जाने लगा, जिसके चलते उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया।
विवादों से भी जुड़ा रहा नाम
सयानी घोष का राजनीतिक सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। राजनीति में आने से पहले सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पुरानी पोस्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। इसके अलावा चुनावी सभाओं में दिए गए कुछ बयान और धार्मिक गीतों को लेकर भी वह चर्चा में रहीं। हालांकि हर विवाद के बाद उन्होंने अपनी सफाई दी और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। इन घटनाओं के बावजूद उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक सक्रियता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
2024 में बनीं लोकसभा सांसद
लोकसभा चुनाव 2024 सयानी घोष के राजनीतिक जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ। पार्टी ने उन्हें जादवपुर सीट से मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज कर संसद तक का सफर तय किया। सांसद बनने के बाद उन्होंने संसद और सड़क दोनों जगह पार्टी की आवाज बुलंद की। उनकी रैलियों में भीड़ जुटने लगी और उन्हें पार्टी का प्रभावी प्रचारक माना जाने लगा। पश्चिम बंगाल के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी उन्हें दी गई।
अब बगावत की चर्चाओं से बढ़ी हलचल
हाल के घटनाक्रम में सयानी घोष का नाम उन नेताओं के साथ जोड़ा जा रहा है जो पार्टी के भीतर अलग रुख अपनाने की चर्चा में हैं। राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक समय ममता बनर्जी को अपना राजनीतिक आदर्श बताने वाली सयानी घोष के बदले रुख को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि आगे की तस्वीर क्या होगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
बंगाल की राजनीति पर नजरें टिकीं
फिलहाल सयानी घोष सिर्फ एक सांसद नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की नई पीढ़ी की राजनीति का अहम चेहरा मानी जाती हैं। अभिनेत्री से नेता और फिर सांसद तक का उनका सफर काफी तेज रहा है। यही वजह है कि उनके हर राजनीतिक कदम पर नजर रखी जा रही है। अगर राजनीतिक समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव होता है तो उसका असर सिर्फ तृणमूल कांग्रेस पर ही नहीं बल्कि पूरे बंगाल की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।
