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खून बहता रहा, फिर भी नहीं छोड़ा कंट्रोल, जब ग्रुप कैप्टन अभिमन्यु सिंह की बहादुरी ने बचाईं कई जिंदगियां

खून बहता रहा, फिर भी नहीं छोड़ा कंट्रोल, जब ग्रुप कैप्टन अभिमन्यु सिंह की बहादुरी ने बचाईं कई जिंदगियां

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन अभिमन्यु सिंह इन दिनों अपनी बहादुरी के लिए चर्चा में हैं। हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। गाजियाबाद में जन्मे अभिमन्यु सिंह ने शुरुआती शिक्षा स्थानीय विद्यालयों से प्राप्त की और बचपन से ही देशसेवा का सपना देखा। इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी का रास्ता चुना और बाद में भारतीय वायुसेना में अधिकारी बने। वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और एक कुशल फाइटर पायलट के रूप में पहचान बनाई।

2009 में शुरू हुआ सैन्य सफर

एनडीए से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अभिमन्यु सिंह ने 2009 में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण एयरबेस पर सेवाएं दीं। पुणे, बरेली, तेजपुर, हलवारा और सिरसा जैसे ठिकानों पर तैनाती के दौरान उन्होंने उड़ान संचालन और प्रशिक्षण से जुड़ी अहम भूमिकाएं निभाईं। वे केवल लड़ाकू विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहे बल्कि फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट के रूप में भी अपनी विशेष पहचान बनाई।

21 नवंबर 2024 की वह रात

अभिमन्यु सिंह की बहादुरी की सबसे बड़ी कहानी 21 नवंबर 2024 को सामने आई। उस दिन वह एक प्रशिक्षु पायलट की उड़ान का मूल्यांकन कर रहे थे। उड़ान के दौरान अचानक विमान की पिछली कैनोपी टूट गई, जिससे विमान के भीतर गंभीर तकनीकी संकट पैदा हो गया। टूटे हुए हिस्सों से उन्हें गंभीर चोटें आईं और काफी रक्तस्राव होने लगा। हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे और किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता था।

घायल होने के बावजूद नहीं खोया धैर्य

गंभीर चोट लगने के बाद भी अभिमन्यु सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने विमान का नियंत्रण मजबूती से संभाले रखा और लगातार स्थिति का आकलन करते रहे। एक तरफ खुद की जान पर खतरा था तो दूसरी तरफ प्रशिक्षु पायलट की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी थी। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने धैर्य बनाए रखा और कोई घबराहट नहीं दिखाई। यही निर्णय क्षमता आगे चलकर कई लोगों की जान बचाने का कारण बनी।

आबादी से दूर उतारा विमान

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने विमान को आबादी वाले क्षेत्र से दूर मोड़ दिया। यदि विमान रिहायशी इलाके की ओर बढ़ता तो बड़ा नुकसान हो सकता था। सीमित समय और गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने सुरक्षित लैंडिंग कराई। इस बहादुरी की वजह से प्रशिक्षु पायलट की जान बच गई और जमीन पर भी किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। वायुसेना ने उनकी इस कार्रवाई को असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण माना।

शौर्य चक्र से बढ़ा सम्मान

इस अद्भुत साहस और सूझबूझ के लिए अभिमन्यु सिंह को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। आज वह केवल अपने परिवार या गाजियाबाद ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका यह साहसिक निर्णय दिखाता है कि संकट की सबसे कठिन घड़ी में भी एक सैनिक अपने कर्तव्य को सबसे ऊपर रखता है। यही वजह है कि ग्रुप कैप्टन अभिमन्यु सिंह की कहानी आज देशभर में गर्व और प्रेरणा का विषय बनी हुई है।

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