ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद हालात पूरी तरह बदल गए थे। अमेरिका और इजराइल ने तेजी से जंग खत्म कर नया नेतृत्व स्थापित करने की कोशिश शुरू की। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया था कि नया नेता तय कर लिया गया है, लेकिन 34 दिन बाद तस्वीर उलट गई है।
अमेरिका की रणनीति में आया बड़ा बदलाव
जंग के शुरुआती दिनों में अमेरिका का लक्ष्य ईरान में बदलाव लाना था, लेकिन अब रणनीति बदलती नजर आ रही है। बयानबाजी में सख्ती बढ़ी है और बमबारी पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इस बीच गेविन न्यूजॉम ने कहा कि अमेरिका के पास इस युद्ध से निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं बचा है।
ट्रंप को क्यों आना पड़ा सामने
युद्ध के 34वें दिन ट्रंप को देश को संबोधित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह युद्ध जरूरी था और इससे पीछे हटना संभव नहीं था। हालांकि, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से दूरी बनाने की बात कही, जिससे यह साफ संकेत मिला कि अमेरिका अब सीधे टकराव से बचने की कोशिश कर रहा है।
मुज्तबा के फैसलों ने बढ़ाई चुनौती
खामेनेई के बाद नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा ने कई बड़े फैसले लिए, जिसने हालात को बदल दिया। सबसे अहम फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना रहा, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ा। इसके अलावा सेना को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर रणनीति को ज्यादा लचीला बना दिया गया।
युद्ध को लंबा खींचने की रणनीति
ईरान ने इस बार युद्ध को लंबा खींचने की रणनीति अपनाई है। छोटे स्तर पर फैसले लेने की छूट देकर सेना को ज्यादा सक्रिय बनाया गया है। इससे अमेरिका के लिए सीधे हमला करना मुश्किल हो गया है और जंग जल्दी खत्म होने की संभावना भी कम हो गई है।
ग्लोबल स्तर पर बढ़ा दबाव
ईरान ने अपने कम्युनिकेशन सिस्टम को भी मजबूत किया है और दुनिया भर में संदेश साफ तरीके से पहुंचाया है। इसके साथ ही ब्रिटेन जैसे देशों को भी चेतावनी दी गई, जिससे कई देश पीछे हटते नजर आए। कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।
