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ईरान जंग में सीधे शामिल नहीं फिर भी खाड़ी देशों को बड़ा नुकसान, तेल और पर्यटन पर पड़ा भारी असर

ईरान जंग में सीधे शामिल नहीं फिर भी खाड़ी देशों को बड़ा नुकसान, तेल और पर्यटन पर पड़ा भारी असर

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर सिर्फ जंग लड़ रहे देशों तक सीमित नहीं रहा है। कई ऐसे देश भी हैं जो सीधे तौर पर इस लड़ाई में शामिल नहीं हैं, लेकिन उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। खास तौर पर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को इस संकट से बड़ा झटका लगा है। बताया जा रहा है कि इन देशों को ऊर्जा क्षेत्र में भारी नुकसान उठाना पड़ा है, क्योंकि तेल और गैस के कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ा है।

सऊदी अरब और यूएई को भारी आर्थिक नुकसान
रिपोर्ट्स के अनुसार सऊदी अरब को ऊर्जा कारोबार में करीब 4.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। वहीं यूएई को भी लगभग 5 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण तेल निर्यात पर असर पड़ा है। खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक ऊर्जा निर्यात पर निर्भर रहती है, इसलिए इस संकट का प्रभाव सीधे उनके राजस्व पर दिखाई दे रहा है।

पर्यटन उद्योग भी प्रभावित
इस संघर्ष का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा बल्कि पर्यटन उद्योग भी प्रभावित हुआ है। पर्यटन एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार यूएई को इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। अनुमान है कि वहां पर्यटन कारोबार में लगभग 2.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। इसी तरह सऊदी अरब को भी करीब 2 बिलियन डॉलर का झटका लगा है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कई पर्यटकों ने अपनी यात्रा योजनाएं रद्द कर दीं, जिससे पर्यटन कारोबार पर असर पड़ा है।

जंग का मानवीय और आर्थिक असर
इस संघर्ष के दौरान कई देशों में नागरिकों की जान भी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार यूएई, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब में भी कुछ नागरिकों की मौत की खबरें सामने आई हैं। वहीं इराक में भी कई लोगों की जान गई है। दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुमान के मुताबिक शुरुआती दिनों में ही युद्ध में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद खर्च किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

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