मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच दुश्मनी खत्म करने के लिए एक प्रस्तावित फ्रेमवर्क पर चर्चा जारी है, लेकिन इसी बीच तेहरान ने साफ कर दिया कि वह अस्थायी सुलह के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा। इस फैसले ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। खासकर पाकिस्तान के लिए स्थिति मुश्किल हो गई है, क्योंकि वही इस प्रस्ताव को ईरान तक पहुंचाने और मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है।
इस्लामाबाद समझौते पर संशय
सीजफायर को लेकर जो प्रस्ताव सामने आया है, उसमें दो चरणों की योजना है। पहले चरण में तत्काल युद्धविराम और दूसरे में व्यापक समझौते की बात कही गई है। इस प्रक्रिया में पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच बातचीत जारी है। इस पहल को अनौपचारिक तौर पर इस्लामाबाद समझौता कहा जा रहा है, लेकिन भरोसे की कमी के चलते यह अभी अनिश्चितता में फंसा हुआ है।
होर्मुज बना सबसे बड़ा विवाद
पूरा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर खड़ा हो गया है। रॉयटर्स के अनुसार ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी अस्थायी सीजफायर के बदले इस समुद्री रास्ते को नहीं खोलेगा। तेहरान ने यह भी दोहराया कि वह किसी दबाव या समय सीमा में फैसला नहीं करेगा। पहले खबरें आई थीं कि 45 दिनों के युद्धविराम पर विचार हो सकता है, लेकिन अब ईरान के रुख ने इस संभावना को कमजोर कर दिया है।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप का रुख और ज्यादा आक्रामक हो गया है। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया तो उसके पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रंप ने साफ कहा कि तय समयसीमा के अंदर कार्रवाई नहीं होने पर ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ईरान का पलटवार
ईरान ने ट्रंप की धमकियों का सख्ती से जवाब दिया है। फिनलैंड में ईरानी दूतावास ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट तकनीकी रूप से खुला है, लेकिन तनाव बढ़ने पर वहां से गुजरना मुश्किल हो सकता है। साथ ही ट्रंप के बयान की भाषा पर सवाल उठाते हुए इसे गैर जिम्मेदाराना बताया गया।
बढ़ती अनिश्चितता और खतरा
अब हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां एक तरफ सीजफायर की कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ धमकियों और अविश्वास का माहौल बना हुआ है। पाकिस्तान की मध्यस्थता भी असरदार साबित नहीं हो पा रही है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह तनाव कम होगा या फिर मध्य पूर्व में एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
