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ईरान में खामेनेई को अंतिम विदाई की तैयारी, भारत से भी पहुंचा सर्वधर्म प्रतिनिधिमंडल

ईरान में खामेनेई को अंतिम विदाई की तैयारी, भारत से भी पहुंचा सर्वधर्म प्रतिनिधिमंडल

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम की तैयारियां तेज हो गई हैं। छह दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत 4 जुलाई से तेहरान में होगी, जबकि 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में दफन किया जाएगा। अंतिम संस्कार से पहले तेहरान स्थित ग्रैंड मोसाला परिसर में उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि के लिए रखा गया, जहां देश-विदेश से पहुंचे प्रतिनिधियों ने उन्हें अंतिम सम्मान दिया।

भारत से सर्वधर्म प्रतिनिधिमंडल ने दी श्रद्धांजलि

भारत से भी विभिन्न धर्मों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि ईरान पहुंचे। श्रद्धांजलि देने वालों में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के धर्मगुरु शामिल रहे। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। ईरान के भारत स्थित दूतावास ने इस दौरान की तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल एक साथ नजर आया।

चार महीने बाद शुरू हुई अंतिम विदाई की प्रक्रिया

रिपोर्ट के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत करीब चार महीने पहले हुई थी। अब ईरान ने औपचारिक अंतिम संस्कार कार्यक्रम शुरू किया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस आयोजन की तैयारियां कई दिनों से चल रही थीं और इसे देश के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है। सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है।

छह दिन तक कई शहरों से गुजरेगा अंतिम सफर

कार्यक्रम के तहत 4 से 6 जुलाई तक तेहरान में श्रद्धांजलि और अंतिम यात्रा होगी। इसके बाद 7 जुलाई को जुलूस पवित्र शहर कोम पहुंचेगा। 8 जुलाई को इराक के नजफ और कर्बला में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। अंत में 9 जुलाई को मशहद में इमाम रजा दरगाह परिसर में दफनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ईरानी मीडिया के अनुसार, पूरे कार्यक्रम में करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।

आधिकारिक कार्यक्रम पर दुनिया की नजर

ईरान सरकार ने अंतिम संस्कार को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं और बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। हालांकि, इससे जुड़े कई दावे और राजनीतिक संदेशों को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। आधिकारिक रूप से फिलहाल अंतिम संस्कार कार्यक्रम और श्रद्धांजलि आयोजनों की तैयारियों पर ही ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

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