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होर्मुज पर ईरान का नया दांव, टोल लगाकर अरबों की कमाई की तैयारी, अब आगे क्या होगा ?

होर्मुज पर ईरान का नया दांव, टोल लगाकर अरबों की कमाई की तैयारी, अब आगे क्या होगा ?

ईरान ने 14 दिन के संघर्षविराम के बीच एक बड़ा आर्थिक फैसला लेने की तैयारी कर ली है। होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर 1 डॉलर प्रति बैरल का टोल लगाने की योजना बनाई जा रही है। अगर यह लागू होता है, तो वैश्विक तेल बाजार पर इसका सीधा असर पड़ेगा और कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

कितनी होगी कमाई
इस टोल से ईरान को हर साल 70 से 80 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। भारतीय मुद्रा में यह करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये सालाना बैठती है। यह रकम इतनी बड़ी है कि जंग से पहले तेल निर्यात से होने वाली कमाई से भी लगभग दोगुनी मानी जा रही है। इससे साफ है कि ईरान इस जलमार्ग को अपनी आर्थिक ताकत में बदलना चाहता है।

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज
होर्मुज जलमार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का टोल या बाधा सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार को प्रभावित कर सकती है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है।

युद्ध के बाद बदली रणनीति
फरवरी 2026 में हुए हमलों के बाद ईरान ने इस मार्ग को बंद कर दिया था। अब सीजफायर के बाद इसे खोलने की बात हो रही है, लेकिन इस बार ईरान इसे राजस्व का बड़ा स्रोत बनाने की योजना में है। ईरानी संसद की सुरक्षा समिति भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है, जिससे इसके लागू होने की संभावना बढ़ गई है।

तेल बाजार पर पड़ेगा असर
अगर यह टोल सिस्टम लागू होता है, तो हर बैरल तेल की कीमत में कम से कम 1 डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। पहले ही वैश्विक बाजार तनाव के कारण दबाव में है, ऐसे में यह फैसला कीमतों को और ऊपर ले जा सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं से लेकर बड़े उद्योगों तक सभी प्रभावित होंगे।

आगे क्या होगा बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान इस योजना को पूरी तरह लागू कर पाता है या नहीं। अगर ऐसा होता है, तो यह सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और व्यापार के समीकरण भी बदल सकता है। फिलहाल साफ है कि ईरान तनाव के माहौल में भी अपने राजस्व के नए रास्ते तलाश रहा है।

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