भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk-1A ने आज महाराष्ट्र के नासिक में अपनी पहली सफल उड़ान भरी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग डिविजन से उड़ान भरते ही आसमान में एक नया अध्याय लिखा गया। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशेष रूप से तेजस Mk-1A की तीसरी उत्पादन लाइन और हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर (HTT-40) की दूसरी उत्पादन लाइन का उद्घाटन किया।
नासिक के ओझर एयरोड्रोम पर सुबह के समय आयोजित समारोह में तेजस Mk-1A ने लगभग 30 मिनट की टेस्ट फ्लाइट पूरी की। विमान को HAL के टेस्ट पायलट ने उड़ाया, जो निर्धारित ऊंचाई और गति पर पहुंचकर सुरक्षित लैंडिंग के साथ वापस लौटा। उड़ान के बाद विमान को पारंपरिक पानी की तोपों से सलामी दी गई, जो इस उपलब्धि की भव्यता को दर्शाता था। इस दौरान HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान और सुखोई Su-30 MKI ने भी प्रदर्शनकारी उड़ानें भरीं, जिससे पूरा क्षेत्र गूंज उठा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दृश्य को देखते हुए कहा, "यह क्षण देखकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया। स्वदेशी तेजस हमारी वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग क्षमता का जीता-जागता प्रमाण है।
राजनाथ सिंह ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए HAL नासिक की भूमिका की सराहना की। उन्होंने बताया कि पिछले छह दशकों से HAL ने भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। "एक समय था जब हमारी 65-70 प्रतिशत रक्षा जरूरतें आयात पर निर्भर थीं, लेकिन आज हम 65 प्रतिशत से अधिक उत्पादन स्वदेश में कर रहे हैं। नासिक की यह धरती आस्था के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक बन चुकी है," उन्होंने जोर देकर कहा। मंत्री महोदय ने यह भी उल्लेख किया कि नासिक टीम ने Su-30 पर ब्रह्मोस मिसाइल इंटीग्रेशन का महत्वपूर्ण कार्य किया है, जो रक्षा क्षेत्र में एक और मील का पत्थर है।
तेजस Mk-1A: स्वदेशी तकनीक का चमत्कार
तेजस Mk-1A मूल तेजस LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) का उन्नत संस्करण है, जो पूरी तरह भारतीय डिजाइन और निर्माण पर आधारित है। इस विमान का वजन लगभग 13.5 टन है, जबकि इसकी अधिकतम गति ध्वनि की गति से दोगुनी (मैक 1.8 या 2,205 किमी/घंटा) है। इसमें GE F404-IN20 इंजन लगा है, जो 84 किलो न्यूटन थ्रस्ट प्रदान करता है। विमान में नौ हार्ड पॉइंट्स हैं, जहां इजरायल की डर्बी मिसाइलें, स्वदेशी एस्ट्रा बीवरी-अवे मिसाइलें और विभिन्न प्रकार के बम लादे जा सकते हैं। इसके अलावा, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक रडार, AESA रडार, इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर एवियोनिक्स और मिड-एयर रिफ्यूलिंग क्षमता इसे दुश्मन विमानों से मुकाबले में अजेय बनाती है।
HAL के अनुसार, तेजस Mk-1A में 65 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी पुर्जे हैं, जिन्हें 500 से अधिक भारतीय कंपनियों ने मिलकर तैयार किया है। यह विमान नासिक की फैक्ट्री से पहली बार उड़ा है, जो पहले रूसी विमानों के उत्पादन के लिए जानी जाती थी। अब यह पूरी तरह स्वदेशी उत्पादन का केंद्र बन चुकी है। प्रत्येक विमान की अनुमानित लागत 600 करोड़ रुपये है, जो आयातित जेट्स से काफी कम है।
उत्पादन यूनिट का उद्घाटन
आज के समारोह में रक्षा मंत्री ने नासिक HAL में तेजस Mk-1A के लिए तीसरी असेंबली लाइन और HTT-40 ट्रेनर विमान के लिए दूसरी उत्पादन लाइन का शुभारंभ किया। ये लाइनें उत्पादन क्षमता को दोगुना करने में मदद करेंगी। वर्तमान में, भारतीय वायुसेना (IAF) को 83 तेजस Mk-1A विमानों की डिलीवरी होनी है, जिसकी लागत 48,000 करोड़ रुपये से अधिक है। अगस्त 2024 में सरकार ने 97 और विमानों के लिए 62,370 करोड़ रुपये का अनुबंध HAL के साथ किया था।
HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डी. के. सुनील ने बताया कि ये नई लाइनें 2027 तक Mk-2 संस्करण के रोलआउट और पांचवीं पीढ़ी के AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) स्टेल्थ फाइटर के विकास का पुल बनेंगी। "यह उत्पादन न केवल नौकरियां पैदा करेगा, बल्कि निर्यात के अवसर भी खुलेगा," उन्होंने कहा। नासिक इकाई अब सालाना 16-24 विमानों का उत्पादन करने में सक्षम हो जाएगी, जो IAF की 36 स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने में सहायक होगी।
रक्षा आत्मनिर्भरता की नई दिशा
यह उड़ान भारत की रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। मिग-21 जैसे पुराने विमानों की विदाई के बाद तेजस जैसा स्वदेशी जेट IAF को आधुनिक हथियार प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस Mk-1A पाकिस्तान के JF-17 और चीन के J-10 जैसे विमानों से बेहतर प्रदर्शन करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में खुद तेजस में उड़ान भरी थी, जो इस प्रोजेक्ट के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
राजनाथ सिंह ने समारोह के अंत में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए कहा, "यह केवल एक विमान की उड़ान नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के सपनों की उड़ान है। आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक रक्षा निर्यातक बनेगा।" यह घटना निश्चित रूप से युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रेरित करेगी।



