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SCO में आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी जीत, पाकिस्तान PM के सामने पहलगाम हमले की निंदा

SCO में आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी जीत, पाकिस्तान PM के सामने पहलगाम हमले की निंदा

चीन में SCO के 2025 तियानजिन शिखर सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत हासिल की। इस शिखर सम्मेलन में SCO के सदस्य देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और इसके दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग की। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह शिखर सम्मेलन आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ स्थिति को वैश्विक मंच पर मजबूत करने में सफल रहा।

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इस हमले को द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने अंजाम दिया था, जिसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक प्रॉक्सी माना जाता है। हमले में पीड़ितों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया, जिसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना और धार्मिक विभाजन को बढ़ावा देना था। भारत ने इस हमले के जवाब में 7 मई को "ऑपरेशन सिंदूर" शुरू किया, जिसके तहत सीमा पार आतंकी ढांचे को नष्ट किया गया।

तियानजिन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को वैश्विक खतरे के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है, और कोई भी देश इससे सुरक्षित नहीं है। आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड स्वीकार्य नहीं हैं।" उन्होंने SCO देशों से आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया।

मोदी ने विशेष रूप से पहलगाम हमले का उल्लेख किया और इसे मानवता के खिलाफ एक खुली चुनौती बताया। उन्होंने कहा, "भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है। हाल ही में पहलगाम में हमने आतंकवाद का सबसे बुरा रूप देखा। मैं उन मित्र देशों का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस दुख की घड़ी में हमारे साथ एकजुटता दिखाई।"

तियानजिन घोषणापत्र

शिखर सम्मेलन के अंत में जारी तियानजिन घोषणापत्र में SCO सदस्य देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। घोषणापत्र में कहा गया कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सभी सदस्य देश प्रतिबद्ध हैं और ऐसी गतिविधियों को राजनीतिक या भाड़े के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। घोषणापत्र में यह भी जोर दिया गया कि आतंकवादी हमलों के अपराधियों, आयोजकों और प्रायोजकों को न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।

घोषणापत्र ने भारत की "शून्य सहनशीलता" नीति को प्रतिध्वनित किया और यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड अस्वीकार्य हैं। यह भारत की कूटनीतिक जीत का एक महत्वपूर्ण पहलू था, क्योंकि यह पहली बार था जब SCO ने इतने स्पष्ट रूप से भारत के आतंकवाद विरोधी रुख का समर्थन किया।

SCO के रक्षा मंत्रियों की बैठक में, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्थिति को मजबूती से रखा। उन्होंने क्विंगदाओ, चीन में आयोजित बैठक में एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, क्योंकि इसमें पहलगाम हमले का उल्लेख नहीं था, जबकि पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जफर एक्सप्रेस अपहरण का उल्लेख शामिल था। सिंह ने कहा, "शांति और समृद्धि आतंकवाद के साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकती। कुछ देश सीमा पार आतंकवाद को नीति के एक साधन के रूप में उपयोग करते हैं और आतंकवादियों को शरण देते हैं। SCO को ऐसे देशों की आलोचना करने में संकोच नहीं करना चाहिए।"

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी तियानजिन में SCO विदेश मंत्रियों की बैठक में पहलगाम हमले का उल्लेख किया और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा पहलगाम में 22 अप्रैल का आतंकी हमला जम्मू-कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और धार्मिक विभाजन बोने के लिए किया गया था।

पाकिस्तान और चीन की भूमिका

पाकिस्तान और चीन ने SCO बैठकों में भारत की आतंकवाद संबंधी चिंताओं को कमजोर करने की कोशिश की। पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में आतंकी गतिविधियों का उल्लेख करने पर जोर दिया, जबकि पहलगाम हमले को शामिल करने का विरोध किया। चीन, जो वर्तमान में SCO की अध्यक्षता कर रहा है, ने भी पाकिस्तान का समर्थन किया। हालांकि, भारत के दृढ़ रुख और अन्य सदस्य देशों के समर्थन के कारण, तियानजिन घोषणापत्र में भारत की चिंताओं को शामिल किया गया।

भारत ने SCO में अपनी कूटनीतिक रणनीति के तहत आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहमति बनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल आतंकवाद के मुद्दे को उठाया, बल्कि भारत की विकास यात्रा में SCO देशों को भागीदार बनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, "भारत आज 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। हम हर चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश करते हैं। मैं आप सभी को भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता हूं।

भारत ने SCO के भीतर स्टार्टअप, नवाचार, पारंपरिक चिकित्सा और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में कई पहल की हैं। इसके अलावा, भारत ने इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के माध्यम से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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