केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया को 'यमन' में सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गई है, अब 16 जुलाई को निमिषा को गोली मार दी जाएगी। भारत सरकार भी बैकफुट पर है, अब सिर्फ एक आखिरी लेकिन बहुत छोटी किरण बची है, शरिया कानून के तहत जिसका कत्ल हुआ है उसका परिवार निमिषा को माफ करे.. लेकिन वह भी लगातार इनकार कर रहा है, तो क्या अब भारत की बेटी निमिषा नहीं बच पाएगी।
आपको बता दें पांच माह पहले सउदी अरब में 32 साल की शहजादी को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गई थी और अब यमन में केरल की 38 साल निमिषा प्रिया की बारी है, निमिषा ने एक चर्च की मदद से नर्स की ट्रेनिंग की है, पैसा कमाने के लिए उसने यमन के एक सरकारी अस्पताल में अप्लाई किया औऱ नौकरी मिल गई। 2008 में निमिषा केरल से यमन चली गई और नौकरी करने लगी। 2011 में परिवार ने उसे वापस केरल बुलाया और टॉमी थामस से शादी कर दी। शादी के बाद 2011 में ही निमिषा पति थामस के साथ वापस यमन चली गई, इस बीच एक बच्ची पैदा हुई।
कुछ समय बीता और यमन में गृह युद्ध छिड़ गया और वहां के हालात बिगड़ने लगे। इन हालातों को देखते हुए 2014 में निमिषा ने पति थामस को बेटी के साथ वापस केरल भेज दिय़ा। 2015 आते-आते यमन के हालात और बिगड़ गए, राजधानी सना में हूती विद्रोहियों का कब्जा हो गया। इसके बाद भारत समेत तमाम देशों ने यमन में अपने नागरिकों को आने-जाने पर रोक लग दी। निमिषा वापस भारत आने की स्थिति में नहीं थी तो उसने नौकरी छोड़कर वहीं अपनी क्लीनिक डालने का फैसला किया, लेकिन एक बाधा थी। यमन के कनून के अनुसार यमन का नागरिक ही कोई अस्पताल या क्लीनिक खोल सकता था… इस पर निमिषा ने एक परिचित कारोबारी तलाल अब्दु मेंहदी से बात तो वह तुरंत तैयार हो गया।
निमिषा चाहती थी क्लीनिक में उसका भी मालिकाना हक रहे लेकिन यह तभी मिल संभव था जब वह वहां की नागरिक बनती… और यह तभी संभव था जब वहां के किसी नागरिक से शादी करती। मेंहदी ने उसे फर्जी मैरिज सार्टिफिकेट के जरिए नागरिकता हासिल करने का सुझाव दिया। इस तरह निमिषा की मेंहदी से कागजों पर फर्जी शादी हो गई और वह क्लीनिक में पार्टनर बन गई… लेकिन बहाने से मेहंदी ने निमिषा का पासपोर्ट और जरूरी कागज अपने पास रख लिए। गृह युद्ध में चारो तरफ मारकाट चल रही थी, ऐसे में तमाम घायल क्लीनिक आ रहे थे और अच्छी कमाई हो रही थी। पैसे देख मेहंदी की नियत खराब हो गई और उसने बेईमानी शुरू कर दी। निमिषा ने विरोध किया मेहंदी बदल गया और उसको अपनी पत्नी बता गलत व्यवहार करने लगा। निमिषा को लगा यमन में अब वह सुरक्षित नहीं तो भारत लौटने का फैसला किया…. लेकिन पासपोर्ट मेहंदी के पास था। मेहंदी पासपोर्ट वापस करने को तैयार नहीं था…अब निमिषा किसी भी तरह पासपोर्ट हासिल करने की योजना बनाने लगी।
निमिषा ने अपनी दोस्त यमनी नर्स से बात की, तय हुआ कि मेहंदी के घर जाकर किसी तरह पासपोर्ट हासिल करेंगी। योजना के तहत दोनों मेहंदी के घर पहुंची और मेहंदी को कोई बीमारी बताकर धोखे से नशे का इंजेक्शन लगा दिया। उसके बेहोश होने पर पासपोर्ट तो खोज लिया लेकिन पलट कर देखा तो मेहंदी मर चुका था। समझते देर न लगी कि इंजेक्शन के ओवरडोज से उसकी मौत हुई, इस पर दोनों घबरा गईं और लाश को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली। दोनों नर्सों ने मिलकर मेहंदी की लाश के कई टुकड़े किए और उसी के घर के टैंक में छिपा दिया। दोनों वहां से निकल तो आयीं लेकिन जब हत्या का खुलासा हुआ और पुलिस ने जांच की तो सीसीटीवी कैमरों में दोनों दिख गईं और पकड़ी गईं। यमनी नर्स को तो वहां की निचली अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई लेकिन निमिषा को सजा-ए-मौत दे दी। जेल में रहते हुए निमिषा ने वहां सुप्रीम कोर्ट में अपील की लेकिन यहां से भी राहत नहीं मिली और उसकी सजा-ए-मौत बहाल रही।
सुप्रीम कोर्ट से सजा-ए-मौत मिलने औऱ सारी कानूनी लड़ाई हारने के बाद निमिषा के पास एक आखिरी रास्ता था वह यमन राष्ट्रपति से दया की अपील करे, कुछ लोगों की मदद से उसने रहम की अपील भी की लेकिन राष्ट्रपति ने भी सजा-ए-मौत माफ करने से इनकार कर दिया। राष्ट्रपति के इनकार के बाद सजा-ए-मौत के लिए 16 जुलाई की तारीख तय कर दी गई।
इस बीच निमिषा को बचाने के ले केरल से लेकर यमन तक कुछ लोग सक्रिय हो गए। लोगों ने मिलकर सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल नाम से एनजीओ बनाया… इससे मुहिम काफी आगे बढ़ गई। भारत सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग हुई तो सरकार की ओर से भी बात शुरू की गई लेकिन राष्ट्रपति के सजा-ए-मौत माफी से इनकार के बाद सरकार के पास भी कोई रास्ता नहीं बचा था।अब निमिषा को मौत से बचाने के लिए एक आखिरी धुंधली किरण मेहंदी का परिवार बचा है। यमन में शरिया कानून लागू है और इस कानून के तहत सभी जगह से सजा मिलने के बाद भी पीड़ित का परिवार आरोपी को माफ कर सकता था।… दो ही सूरत हैं मेहंदी का परिवार या तो निमिषा को यूं ही माफ कर दे या फिर कुछ पैसा लेकर माफी दे, इस पैसे को वहां ब्लडमनी कहा जाता है।
निमिषा के लिए लड़ रही काउंसिल ने मेहंदी के परिवार से संपर्क किया और पैसा इकट्ठा करके एक मिलियन यूएस डालर तक का ऑफर दे डाला। इसके बाद भी परिवार नहीं माना तो पैसों के साथ औऱ कई ऑफर दिए लेकिन परिवार का रुख बिलकुल सकारात्मक नहीं है। काउंसिल ने वहां के प्रभावशाली लोगों से संपर्क करके उनसे भी परिवार पर दबाव डलवाया लेकिन अभी तक वह टस से मस नहीं हुआ।
परिवार का रुख देखते हुए काउंसिल ने सोमवार को भारत की सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें सरकार को हस्तक्षेप का आदेश देने की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है….यानी सजा से मात्र 48 घंटे पहले सुनवाई होगी।
सरकार के सामने मुश्किल यह है यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों का कब्जा है, गृह युद्ध के कारण भारत दूतावास बंद करना पड़ा है। साउदी अरब के राजदूत ही यमन का भी कामकाम देख रहे हैं। निमिषा आठ सालों से राजधानी सना की सेंट्रल में बंद है और सरकार के पास हूती विद्रोहिय़ों से कोई संपर्क नहीं है….तो बात कैसे हो। सरकार ने भरोसा तो दिया है लेकिन कोई रास्ता निकलने की उम्मीद अब दम तोड़ती जा रही है…इसी के सथ निमिषा की जिंदगी के कलेंडर की आखिरी तारीख तेजी से नजदीक आती जा रही है।
निमिषा को कैसे मिलेगी सजा
यमन में बहुत निर्मम तरीके से मौत की सजा दी जाती है। आरोपी को फांसी के बजाय गोली मारी जाती है। जल्लाद एक कंबल में पीठ के बल लिटाता है और पीठ में ठीक उस गोली मारी जाती है जहां दिल होता है।



