भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत को लेकर नया अपडेट सामने आया है। उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच इस महीने समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि मार्च में यह डील साइन होना मुश्किल नजर आ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक अभी इस मामले में कुछ मुद्दों पर चर्चा जारी है।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी
भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि फिलहाल समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका इस समय वैश्विक स्तर पर टैरिफ से जुड़ी नई व्यवस्था तैयार करने में लगा हुआ है। ऐसे में भारत इस प्रक्रिया में थोड़ी और स्पष्टता आने का इंतजार कर रहा है।
टैरिफ नीति पर बनी हुई है स्थिति
अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में अमेरिका की नीति के अनुसार दुनिया के कई देशों पर लगभग 10 प्रतिशत का टैरिफ लागू है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित समझौता इस व्यवस्था से अलग हो सकता है। इसलिए दोनों पक्ष इस बात पर सावधानी से विचार कर रहे हैं ताकि आगे किसी तरह की परेशानी न हो।
समझौता टला, रद्द नहीं हुआ
सरकारी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह समझौता रद्द नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अभी वार्ताकार दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखे हुए हैं। इसलिए यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस पर सहमति बन सकती है और समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
दोनों देशों के लिए अहम है यह डील
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इसी वजह से यह समझौता दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे व्यापारिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा संकट पर भी सरकार का बयान
मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी अपनी रणनीति स्पष्ट की है। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच भारत ने रूस से तेल की खरीद बढ़ा दी है। इसका मकसद देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और संभावित संकट से बचाव करना है।
