भारत में जल्द प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोटों की एंट्री हो सकती है। हाल के दिनों में ऐसी चर्चाएं तेज हुई हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक कागजी नोटों के विकल्प के रूप में पॉलीमर नोटों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस विषय पर रिजर्व बैंक की बोर्ड बैठकों में भी चर्चा हुई है। हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस खबर ने लोगों के बीच उत्सुकता जरूर बढ़ा दी है।
क्यों खास होंगे नए नोट?
पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं। ये जल्दी फटते नहीं हैं और नमी या गंदगी का असर भी इन पर कम पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नोट लंबे समय तक चल सकते हैं, जिससे बार-बार नई करेंसी छापने की जरूरत कम होगी। इसके अलावा सुरक्षा फीचर बेहतर होने की वजह से नकली नोटों पर भी लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।
RBI क्यों कर रहा विचार?
रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार नोटों की छपाई पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। पिछले वित्त वर्ष में नोट छापने का खर्च हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके साथ ही बड़ी संख्या में पुराने और खराब नोटों को वापस लेना पड़ा। खासकर 500 और 100 रुपये के नोट सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले विकल्प की तलाश तेज हो गई है।
पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय बैंक पॉलीमर नोटों को लेकर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी विचार कर सकता है। यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो पहले सीमित स्तर पर नए नोट जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद मिलने वाले अनुभव और प्रतिक्रिया के आधार पर बड़े स्तर पर फैसला लिया जाएगा। माना जा रहा है कि मौजूदा एटीएम प्रणाली भी ऐसे नोटों को संभालने में सक्षम होगी।
नकदी की मांग लगातार बढ़ रही
डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बावजूद देश में नकदी की मांग कम नहीं हुई है। आंकड़े बताते हैं कि प्रचलन में मौजूद मुद्रा लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि रिजर्व बैंक को हर साल बड़ी संख्या में नए नोट छापने पड़ते हैं। बढ़ती मांग और बढ़ते खर्च ने नई तकनीक वाले नोटों की जरूरत को और मजबूत किया है।
क्या जल्द बदल जाएंगे नोट?
फिलहाल प्लास्टिक नोटों को लेकर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। लेकिन अगर योजना को मंजूरी मिलती है तो आने वाले वर्षों में भारतीय करेंसी का स्वरूप बदल सकता है। इससे नोटों की उम्र बढ़ेगी, छपाई लागत घटेगी और नकली नोटों पर नियंत्रण में मदद मिल सकती है। अब सबकी नजर रिजर्व बैंक की अगली घोषणा पर टिकी हुई है।
