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Independence Day: 15 अगस्त को ही क्यों मिली थी भारत को आजादी

Independence Day: 15 अगस्त को ही क्यों मिली थी भारत को आजादी

15 अगस्त, 1947, वह ऐतिहासिक दिन है जब भारत ने लगभग 200 वर्षों के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की। यह दिन भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जो दशकों के संघर्ष, बलिदान और अथक प्रयासों का परिणाम था। लेकिन सवाल यह है कि भारत को आजादी क्यों और कैसे 15 अगस्त को ही मिली? तो चलिए इसके आपको इसके पीछे की घटनाओं और भारत की स्वतंत्रता की कहानी को विस्तार बता है।

भारत में ब्रिटिश शासन की शुरुआत 17वीं सदी में ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन के साथ हुई। 1857 की क्रांति, जिसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में जाना जाता है, ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहला बड़ा विद्रोह शुरू किया। हालांकि यह विद्रोह असफल रहा, लेकिन इसने स्वतंत्रता की चिंगारी को जन्म दिया। 19वीं सदी के अंत तक, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1885 में स्थापित) और अन्य संगठनों ने स्वतंत्रता के लिए संगठित आंदोलन शुरू किए।

20वीं सदी में, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह जैसे नेताओं और लाखों भारतीयों ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। दांडी नमक सत्याग्रह (1930), भारत छोड़ो आंदोलन (1942) जैसे आंदोलनों ने ब्रिटिश शासन को कमजोर किया। साथ ही, द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) ने ब्रिटेन को आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर कर दिया, जिससे भारत में उनका शासन बनाए रखना मुश्किल हो गया।

15 अगस्त की तारीख का चयन क्यों?

15 अगस्त, 1947 को भारत को आजादी मिलने की तारीख का चयन कई कारकों का परिणाम था। द्वितीय विश्व युद्ध ने ब्रिटेन की आर्थिक और सैन्य शक्ति को कमजोर कर दिया था। युद्ध के बाद, ब्रिटेन के पास भारत जैसे विशाल उपनिवेश को नियंत्रित करने के लिए संसाधन और इच्छाशक्ति की कमी थी। ब्रिटिश सरकार ने यह महसूस किया कि भारत को स्वतंत्रता देना अब अपरिहार्य है।

ब्रिटिश सरकार का निर्णय
1946 में, ब्रिटिश सरकार ने कैबिनेट मिशन को भारत भेजा, जिसका उद्देश्य भारत के लिए स्वतंत्रता की रूपरेखा तैयार करना था। 1947 की शुरुआत में, ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने घोषणा की कि ब्रिटेन जून 1948 तक भारत को सत्ता हस्तांतरित कर देगा। हालांकि, भारत में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और प्रशासनिक अस्थिरता के कारण इस समयसीमा को पहले करना पड़ा।

लॉर्ड माउंटबेटन की भूमिका
लॉर्ड माउंटबेटन, भारत के अंतिम वायसराय, ने स्वतंत्रता की प्रक्रिया को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 3 जून, 1947 को माउंटबेटन योजना की घोषणा की, जिसमें भारत और पाकिस्तान के रूप में दो स्वतंत्र देशों का निर्माण और 15 अगस्त, 1947 को सत्ता हस्तांतरण की तारीख तय की गई।

15 अगस्त का प्रतीकात्मक महत्व
15 अगस्त का चयन कुछ हद तक प्रतीकात्मक भी था। लॉर्ड माउंटबेटन ने इस तारीख को इसलिए चुना क्योंकि यह द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ थी (15 अगस्त, 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण किया था)। माउंटबेटन के लिए यह तारीख व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि वे इस जीत से जुड़े हुए थे।

    भारत-पाकिस्तान विभाजन और स्वतंत्रता

    15 अगस्त, 1947 को भारत की आजादी के साथ ही देश का विभाजन भी हुआ, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान का निर्माण हुआ। मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के लिए अलग देश की मांग की थी, जिसे ब्रिटिश सरकार ने स्वीकार कर लिया। 14 अगस्त, 1947 को पाकिस्तान को स्वतंत्रता मिली, और अगले दिन, 15 अगस्त को भारत स्वतंत्र हुआ।

    विभाजन के साथ ही लाखों लोगों का पलायन, सांप्रदायिक दंगे और हिंसा की त्रासदी भी जुड़ी। फिर भी, 15 अगस्त का दिन भारत के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक था।

    15 अगस्त, 1947: ऐतिहासिक क्षण

    15 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को, नई दिल्ली में संसद भवन में एक विशेष सत्र आयोजित हुआ। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने ऐतिहासिक भाषण "ट्रिस्ट विद डेस्टिनी" (नियति से साक्षात्कार) में भारत की आजादी और भविष्य के सपनों को व्यक्त किया। सुबह, नेहरू ने लाल किले पर तिरंगा फहराया, जो भारत की स्वतंत्रता का प्रतीक बना।

    स्वतंत्रता के बाद की चुनौतियाँ

    स्वतंत्रता के साथ ही भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विभाजन के बाद की हिंसा, शरणार्थियों का पुनर्वास, रियासतों का एकीकरण, और एक नए संविधान का निर्माण जैसे मुद्दों ने नए भारत को आकार दिया। फिर भी, 15 अगस्त का दिन भारतीयों के लिए गर्व और उत्सव का दिन बना रहा।

    15 अगस्त का महत्व

    हर साल 15 अगस्त को भारत स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाता है। यह दिन देशभक्ति, बलिदान और एकता का प्रतीक है। लाल किले से प्रधानमंत्री का भाषण, परेड, और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस दिन को विशेष बनाते हैं। यह दिन हमें उन स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने और भारत को प्रगति के पथ पर ले जाने की प्रेरणा देता है।

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