होर्मुज स्ट्रेट पर नया संकट, जहाजों से वसूली के आरोप, क्या बढ़ेगा वैश्विक तेल संकट और महंगाई का खतरा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलसंधि अब दुनिया के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है। यह समुद्री रास्ता तेल और गैस की सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसी बीच ईरान पर आरोप लगे हैं कि वह इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से भारी रकम वसूल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षित गुजरने के लिए जहाजों से करीब 20 लाख डॉलर तक की फीस मांगी जा रही है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।
ईरान ने क्यों उठाया यह कदम
ईरान के नेताओं का कहना है कि मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति में खर्च बढ़ गया है, इसलिए यह कदम उठाया गया है। उनका दावा है कि इस रणनीतिक रास्ते पर उनका अधिकार है और यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेना गलत नहीं है। साथ ही ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह उन देशों के जहाजों को ज्यादा सख्ती से देख रहा है, जिन्हें वह अपना विरोधी मानता है।
दुनिया के लिए क्यों अहम है यह रास्ता
होर्मुज जलसंधि की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। अगर इस मार्ग पर कोई बाधा आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ता है। मार्च से यहां बढ़े तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही कम हुई है और इसका असर अब तेल की कीमतों पर भी दिखने लगा है।
कुछ देशों को मिल रही राहत
हालांकि सभी जहाजों के लिए नियम एक जैसे नहीं हैं। कुछ देशों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। भारत के गैस जहाजों को यहां से गुजरने की छूट मिली है और एक पाकिस्तानी टैंकर भी इस रास्ते से निकल चुका है। इससे साफ है कि ईरान कुछ मामलों में लचीलापन दिखा रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं है।
अमेरिका और ईरान आमने-सामने
इस पूरे मामले में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह इस जलमार्ग को जल्द खोले, जबकि ईरान ने भी सख्त जवाब देने की बात कही है। दोनों देशों के बीच बढ़ता टकराव स्थिति को और गंभीर बना सकता है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
महंगाई और संकट का बढ़ता खतरा
अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। ऐसे में दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि यह संकट कब तक सुलझेगा और हालात कब सामान्य होंगे।
