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होर्मुज में बड़ा हमला, ईरानी नेवी चीफ की मौत से बढ़ा तनाव, दुनिया की नजरें टिकीं

होर्मुज में बड़ा हमला, ईरानी नेवी चीफ की मौत से बढ़ा तनाव, दुनिया की नजरें टिकीं

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुए एक बड़े सैन्य हमले में अलीरेजा तंगसीरी की मौत की खबर सामने आई है। यह इलाका दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है, जहां पहले से ही तनाव चरम पर था। हमले के बाद पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

बंदर अब्बास बना निशाना, बड़ा रणनीतिक झटका
रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले का निशाना बंदर अब्बास का इलाका था, जो ईरान का प्रमुख बंदरगाह और तेल व्यापार का अहम केंद्र है। एक इजरायली अधिकारी के हवाले से बताया गया कि यह हमला बड़े सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा था। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इस हमले के पीछे अमेरिका था या इजरायल, लेकिन इस घटना ने मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है।

कौन थे अलीरेजा तंगसीरी
अलीरेजा तंगसीरी ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना के प्रमुख थे और देश की समुद्री सुरक्षा रणनीति के अहम चेहरे माने जाते थे। वे खासतौर पर फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की ताकत को मजबूत करने के लिए जाने जाते थे। उनकी रणनीति ‘असमान युद्ध’ पर आधारित थी, जिसमें छोटे और तेज हथियारों के जरिए बड़े दुश्मनों को चुनौती दी जाती थी।

अमेरिका को दी थी सख्त चेतावनी
हाल के दिनों में तंगसीरी लगातार आक्रामक बयान दे रहे थे। उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों को साफ चेतावनी दी थी कि अगर ईरान के हितों को नुकसान पहुंचा तो जवाबी कार्रवाई होगी। उन्होंने यहां तक कहा था कि अमेरिका से जुड़े तेल ठिकानों को भी सैन्य लक्ष्य माना जाएगा और उन पर हमला किया जा सकता है।

हमले के बाद बढ़ा युद्ध का खतरा
इस घटना के बाद मिडिल ईस्ट में हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। पहले से चल रहे तनाव के बीच अब यह हमला बड़े टकराव का कारण बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना पर नजर रखी जा रही है और कई देशों ने चिंता जताई है।

आने वाले दिनों में बढ़ सकती है हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना क्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत हो सकती है। अगर हालात नहीं संभले तो आने वाले दिनों में सैन्य टकराव और तेज हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस इलाके पर टिकी हुई है, जहां हर कदम का असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर पड़ सकता है।

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