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हिमाचल प्रदेश: रामलीला के मंच पर कलाकार की हार्ट    अटैक से मौत

हिमाचल प्रदेश: रामलीला के मंच पर कलाकार की हार्ट अटैक से मौत

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक दुखद घटना घटी, जहां रामलीला के दौरान स्टेज पर एक वरिष्ठ कलाकार की अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई। 73 वर्षीय अमरेश महाजन, जिन्हें स्थानीय स्तर पर शिबू के नाम से जाना जाता था, दशरथ की भूमिका निभा रहे थे। यह घटना मंगलवार रात को चंबा के ऐतिहासिक चौगान मैदान में हुई, जहां रामलीला का आयोजन चल रहा था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कलाकार के गिरने का पल कैद है।

रामलीला का दूसरा दिन था और मंच पर सीता स्वयंवर की तैयारी से जुड़ी दृश्य चल रहा था। अमरेश महाजन दशरथ के किरदार में राजा की भूमिका निभा रहे थे और उन्होंने जोरदार आवाज में डायलॉग बोला, "मैं तुम्हारे लिए अपनी जान कुर्बान कर दूंगा।" इसके ठीक बाद वे अचानक बाएं तरफ झुक गए और उनके सह-कलाकार के कंधे पर सिर रखकर गिर पड़े। शुरू में सह-कलाकारों और दर्शकों को लगा कि यह अभिनय का हिस्सा है, लेकिन कुछ सेकंड बाद जब वे होश में नहीं आए, तो मंच पर अफरा-तफरी मच गई। पर्दा गिरा दिया गया और प्रदर्शन तुरंत रोक दिया गया।

कलाकारों ने तुरंत अमरेश को उठाया और पास के पंडित जवाहर लाल नेहरू सरकारी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। घटना रात करीब 8:30 बजे की बताई जा रही है, हालांकि कुछ रिपोर्टों में इसे 1:30 बजे का उल्लेख है।

अमरेश महाजन का बैकग्राउंड

अमरेश महाजन चंबा के मुगला मोहल्ला के निवासी थे और पिछले 40 वर्षों से रामलीला से जुड़े हुए थे। वे अक्सर दशरथ या रावण जैसे प्रमुख किरदार निभाते थे और उनकी परफॉर्मेंस दर्शकों को खूब आकर्षित करती थी। इस साल उन्होंने घोषणा की थी कि यह उनकी आखिरी रामलीला होगी, क्योंकि वे उम्र के इस पड़ाव पर रिटायर होना चाहते थे। रामलीला क्लब के अध्यक्ष स्वपन महाजन ने बताया कि अमरेश क्लब के लिए एक मजबूत स्तंभ थे और उनकी मौत से पूरा शहर सदमे में है। "यह हमारे लिए अपूरणीय क्षति है," उन्होंने कहा।

चंबा में रामलीला का आयोजन 1949 से हो रहा है और अमरेश जैसे कलाकारों ने इसे जीवंत रखा। उनकी मौत के बाद क्लब ने अगले कुछ दिनों के सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। स्थानीय व्यापार मंडल के अध्यक्ष वीरेंद्र महाजन और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल पंकज गुप्ता समेत कई लोगों ने श्रद्धांजलि दी।

दर्शकों और आयोजकों की प्रतिक्रिया

घटना के वक्त मैदान में सैकड़ों दर्शक मौजूद थे, जो अमरेश की परफॉर्मेंस पर तालियां बजा रहे थे। लेकिन जैसे ही सच्चाई सामने आई, उत्सव का माहौल शोक में बदल गया। कई दर्शकों ने बताया कि पहले तो उन्हें लगा कि यह नाटक का हिस्सा है, लेकिन जब कलाकारों ने मदद मांगी, तो सभी स्तब्ध रह गए। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को साझा कर रहे हैं और युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों पर चिंता जता रहे हैं।

वायरल वीडियों का सच

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अमरेश महाजन को सिंहासन पर बैठे डायलॉग बोलते हुए देखा जा सकता है। वे हंसते हुए अपना लाइन बोलते हैं, फिर अचानक झुक जाते हैं। सह-कलाकार, जो ऋषि विश्वामित्र का किरदार निभा रहा था, पहले चुप रहता है, लेकिन फिर मदद के लिए पुकारता है। बैकस्टेज से लोग दौड़कर आते हैं और पर्दा गिरा दिया जाता है। यह वीडियो घटना की गंभीरता को दर्शाता है और लोगों को हेल्थ चेकअप की याद दिला रहा है।

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हार्ट अटैक से मौत कैसे होती है?

हार्ट अटैक, जिसे मेडिकल भाषा में मायोकार्डियल इंफार्क्शन (MI) कहा जाता है, तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है या पूरी तरह रुक जाता है। यह आमतौर पर कोरोनरी धमनियों में प्लाक (फैट, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों का जमाव) के कारण होता है, जो एथेरोस्क्लेरोसिस नामक प्रक्रिया से बनता है। अगर प्लाक फट जाता है, तो वहां खून का थक्का बन जाता है, जो धमनी को ब्लॉक कर देता है। इससे हृदय की मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिलता, और कोशिकाएं मरने लगती हैं।

यह प्रक्रिया कुछ मिनटों से लेकर घंटों तक चल सकती है। अगर रक्त प्रवाह जल्दी बहाल नहीं होता, तो हृदय की मांसपेशियां स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे हृदय ठीक से पंप नहीं कर पाता। इससे शरीर के अन्य अंगों तक रक्त नहीं पहुंचता, और मौत हो सकती है। मुख्य कारणों में शामिल हैं:

  • अतालता (अरिदमिया): हृदय की क्षतिग्रस्त मांसपेशियां सामान्य लय बिगाड़ देती हैं, जैसे वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन, जिसमें हृदय अनियमित रूप से धड़कता है या रुक जाता है। यह अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बनता है, जो मौत का प्रमुख तरीका है।
  • कार्डियोजेनिक शॉक: हृदय इतना कमजोर हो जाता है कि शरीर को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता, जिससे अंग फेल हो जाते हैं।
  • हृदय फेलियर या रप्चर: क्षतिग्रस्त हृदय फट सकता है या पूरी तरह काम करना बंद कर सकता है।
  • अन्य जटिलताएं: जैसे पेरिकार्डाइटिस (हृदय के आसपास सूजन) या थक्के का शरीर के अन्य हिस्सों में फैलना।

ज्यादातर मौतें अस्पताल पहुंचने से पहले होती हैं, और पहले साल में 5-12% अतिरिक्त जोखिम रहता है। उम्र, डायबिटीज, देर से इलाज जैसे कारक स्थिति बिगाड़ते हैं।

हार्ट अटैक से बचाव के तरीके

हार्ट अटैक को रोका जा सकता है, खासकर जोखिम कारकों को नियंत्रित करके। मुख्य बचाव के उपाय निम्नलिखित हैं:

  • धूम्रपान छोड़ें: यह सबसे प्रभावी कदम है, क्योंकि यह थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ाता है। वाष्पीकरण (वेपिंग) और तंबाकू उत्पादों से भी दूर रहें।
  • स्वास्थ्य जांच करवाएं: सालाना डॉक्टर से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच कराएं। उच्च रक्तचाप को 140/90 mm Hg से नीचे रखें।
  • स्वस्थ आहार अपनाएं: संतृप्त वसा कम करें; फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मछली और प्लांट-बेस्ड भोजन लें। मेडिटेरेनियन या DASH डाइट फॉलो करें। BMI 20-25 kg/m² और कमर की माप पुरुषों में 94 cm से कम, महिलाओं में 80 cm से कम रखें।
  • नियमित व्यायाम: हफ्ते में 5 दिन 30 मिनट मध्यम तीव्रता का व्यायाम करें, जैसे वॉकिंग या योग।
  • वजन नियंत्रित रखें: मोटापा जोखिम बढ़ाता है; डॉक्टर की सलाह से वजन कम करें।
  • अन्य स्वास्थ्य स्थितियां प्रबंधित करें: डायबिटीज, उच्च कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप का इलाज कराएं। दवाएं जैसे एस्पिरिन, स्टेटिन्स या बीटा-ब्लॉकर्स डॉक्टर की सलाह से लें।
  • तनाव कम करें: योग, ध्यान या गहरी सांस लेने की तकनीकें अपनाएं।
  • शराब और ड्रग्स से बचें: अधिक शराब न पिएं और ड्रग्स से दूर रहें।
  • कार्डियक रिहैबिलिटेशन: अगर पहले हार्ट अटैक हुआ हो, तो रिहैब प्रोग्राम जॉइन करें।

जोखिम कारक जैसे उम्र, परिवार का इतिहास या जेनेटिक्स को बदला नहीं जा सकता, लेकिन जीवनशैली बदलाव से 80% तक हार्ट अटैक रोके जा सकते हैं।

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