पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में मंगलवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह ठप कर दिया है। रिकॉर्डतोड़ वर्षा के कारण शहर के अधिकांश हिस्सों में जलभराव हो गया है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। सबसे दर्दनाक खबर यह है कि करंट लगने की घटनाओं के कारण अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने आगामी दिनों में और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे दुर्गा पूजा की तैयारियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक कोलकाता में औसतन 200-300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। आईएमडी के अनुसार, अलीपुर मौसम केंद्र में सुबह 6:30 बजे तक 247.4 मिमी वर्षा हुई, जबकि कामदहारी में 332 मिमी और जोधपुर पार्क में 285 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण यह वर्षा हुई, जो उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है।
शहर के प्रमुख इलाकों जैसे कालीघाट, दक्षिणेश्वर, चितपुर, श्यामबाजार और हावड़ा में सड़कें नदियों में बदल गईं। कई जगहों पर घरों में पानी घुस गया, जिससे निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जलभराव इतना गहरा हो गया कि वाहन डूबने लगे और पैदल चलना भी मुश्किल हो गया।
ज्यादातर करंट लगने से हादसे
भारी बारिश और जलभराव के बीच सबसे ज्यादा हादसे करंट लगने से हुए। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश को पानी से लबालब सड़कों पर खुले तारों से करंट लग गया। आधिकारिक रूप से दो मौतों की पुष्टि हुई है, लेकिन अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार संख्या सात तक पहुंच गई है।
एक 45 वर्षीय मजदूर, जो कालीघाट में काम कर रहा था, वहां गिरे तार से करंट लगने से मारा गया। इसी तरह, दक्षिणेश्वर में एक बुजुर्ग महिला और दो युवक भी इसी तरह की घटना के शिकार हुए। जलभराव में फिसलन के कारण दो लोग गिरकर घायल हुए, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन ने करंट से बचाव के लिए सतर्कता बरतने की अपील की है, लेकिन बारिश न रुकने से स्थिति बेकाबू बनी हुई है।
यातायात और सेवाएं ठप
भारी वर्षा का सबसे ज्यादा असर परिवहन पर पड़ा। पूर्वी रेलवे के चितपुर यार्ड में जलभराव के कारण सर्कुलर रेल लाइन पर ट्रेनें रुक गईं। वंदे भारत एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों का शेड्यूल बदल दिया गया। दक्षिणेश्वर और मैदान स्टेशनों के बीच सीमित सेवाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन पूर्ण बहाली में समय लगेगा।
कोलकाता मेट्रो की सेवाएं कई घंटों के लिए ठप हो गईं। श्यामबाजार और अन्य स्टेशनों पर पानी भरने से यात्री फंस गए। प्रमुख सड़कें जैसे ईएम बायपास, केश्तोपुर और बेलघाटिया में जाम लग गया। कई उड़ानें प्रभावित हुईं, और नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर देरी दर्ज की गई। शहर के बड़े हिस्से में बिजली कटौती हो गई, जबकि इंटरनेट सेवाएं भी बाधित रहीं।स्कूलों और कॉलेजों को छुट्टी घोषित कर दी गई है, जिससे छात्रों को राहत मिली।
दुर्गा पूजा पर संकट
दुर्गा पूजा का त्योहार महज एक सप्ताह दूर है, लेकिन बारिश ने तैयारियों पर पानी फेर दिया। कई पंडाल जलमग्न हो गए, मूर्ति निर्माण स्थल पानी में डूबे हुए हैं। कारीगरों और आयोजकों को भारी नुकसान हो रहा है। आईएमडी ने 24 सितंबर तक पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना, झारग्राम और बांकुड़ा जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी है। 27 सितंबर तक बारिश जारी रहने का अनुमान है।
राहत कार्य तेज
पश्चिम बंगाल सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रभावितों को तत्काल सहायता का आश्वासन दिया है। एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं, जो जल निकासी और बचाव कार्य में जुटी हैं। नगर निगम की टीमें पंपों से पानी निकालने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन लगातार बारिश से चुनौतियां बढ़ रही हैं।
जलवायु परिवर्तन का असर?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के कारण यह असामान्य वर्षा हुई है। जलवायु परिवर्तन के चलते ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे शहर की ड्रेनेज व्यवस्था अपर्याप्त साबित हो रही है। आईएमडी ने लाल सतर्कता जारी की है और लोगों से घरों में रहने की सलाह दी है।



