अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर बड़ा राजनीतिक कदम सामने आया है। एली क्रेन समेत रिपब्लिकन सांसदों ने ‘End H-1B Visa Abuse Act of 2026’ नाम का बिल पेश किया है, जिसमें इस वीजा प्रोग्राम पर 3 साल की रोक लगाने और पूरी व्यवस्था को नए सिरे से लागू करने की बात कही गई है। उनका कहना है कि मौजूदा सिस्टम अमेरिकी कर्मचारियों के हितों के खिलाफ काम कर रहा है।
नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित
इस बिल के तहत H-1B वीजा की सालाना सीमा 65,000 से घटाकर सिर्फ 25,000 करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा लॉटरी सिस्टम को खत्म कर वेतन आधारित चयन प्रक्रिया लागू की जाएगी, जिसमें कम से कम 200,000 डॉलर सालाना सैलरी अनिवार्य होगी। साथ ही सभी तरह की छूट खत्म करने और नियमों को और सख्त बनाने की बात कही गई है।
अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता
रिपब्लिकन नेताओं का दावा है कि इस कदम से अमेरिकी नागरिकों को ज्यादा नौकरी के अवसर मिलेंगे। ब्रैंडन गिल और पॉल गोसर जैसे सांसदों ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि इमिग्रेशन सिस्टम को इस तरह बदला जाना चाहिए कि पहले अमेरिकी कामगारों के हित सुरक्षित हों।
कंपनियों पर भी सख्ती
नए प्रस्ताव के मुताबिक कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उन्हें कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल रहा, तभी वे विदेशी कर्मचारी रख सकेंगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने हाल ही में कर्मचारियों की छंटनी नहीं की है। इसके अलावा H-1B धारकों को एक से ज्यादा नौकरी करने से रोका जाएगा और थर्ड पार्टी एजेंसियों के जरिए भर्ती पर भी रोक लगाने की बात कही गई है।
विदेशी कर्मचारियों पर असर
इस बिल में कई सख्त प्रावधान शामिल हैं, जैसे H-1B कर्मचारियों को अपने परिवार को साथ लाने पर रोक, OPT प्रोग्राम खत्म करना और ग्रीन कार्ड यानी स्थायी नागरिकता की राह भी कठिन बनाना। इससे खासतौर पर भारतीय पेशेवरों पर बड़ा असर पड़ सकता है, जो बड़ी संख्या में इस वीजा पर अमेरिका में काम करते हैं।
आगे क्या होगा फैसला
फिलहाल यह बिल प्रस्ताव के तौर पर पेश किया गया है और इसे कानून बनने के लिए कई चरणों से गुजरना होगा। लेकिन अगर यह पास हो जाता है, तो H-1B वीजा सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे न सिर्फ कंपनियों की रणनीति बदलेगी, बल्कि हजारों विदेशी पेशेवरों का भविष्य भी प्रभावित होगा।
