logo

header-ad
header-ad
सोना-चांदी ने चमकाया बाजार: धनतेरस पर ₹1 लाख करोड़ की खरीदारी, पिछले साल से 25% ज्यादा

सोना-चांदी ने चमकाया बाजार: धनतेरस पर ₹1 लाख करोड़ की खरीदारी, पिछले साल से 25% ज्यादा

धनतेरस के शुभ अवसर पर देशभर में खरीदारी का सैलाब उमड़ पड़ा। ऑल इंडिया ट्रेडर्स कॉन्फेडरेशन (सीएआईटी) के अनुसार, उपभोक्ताओं ने कुल 1 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी की, जिसमें सोना-चांदी की खरीद पर ही 60 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक है। ऊंची कीमतों के बावजूद सांस्कृतिक परंपरा और निवेश के लालच ने उपभोक्ताओं को बाजारों में खींच लिया, जिससे ज्वेलर्स की बिक्री में मूल्य के लिहाज से उछाल आया।

धनतेरस, दीवाली से ठीक एक दिन पहले मनाया जाने वाला यह त्योहार, हमेशा से ही धन-समृद्धि का प्रतीक रहा है। इस बार 18 अक्टूबर को पड़े धनतेरस पर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक बाजार जगमगा उठे। सीएआईटी के चेयरमैन बीसी भट्ट ने बताया, "सोने-चांदी की कीमतों में 39 प्रतिशत की तेजी के बावजूद बिक्री मूल्य में इजाफा हुआ। वॉल्यूम में 10-15 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन ऊंचे दामों ने वैल्यू को बढ़ा दिया। कुल मिलाकर, यह त्योहार व्यापारियों के लिए राहत लेकर आया।"

सोने की चमक बरकरार

इस साल सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। धनतेरस के दिन 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम के लिए 1,34,800 रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल के 81,400 रुपये से लगभग 65 प्रतिशत अधिक है। चांदी भी 1,74,306 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी। इसके बावजूद, उपभोक्ताओं ने सिक्कों, बार और हल्के ज्वेलरी पर फोकस किया। गोल्ड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, ज्वेलरी की बिक्री में 16 प्रतिशत की कमी आई, लेकिन निवेशक उत्पादों जैसे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स और ईटीएफ में रुचि बढ़ी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के सर्राफा बाजार में ही 300 किलोग्राम से अधिक सोना बिका, जिसकी वैल्यू 4,000 करोड़ रुपये से ऊपर रही। मुंबई के जोहरी बाजार में चांदी की बिक्री दोगुनी हो गई, खासकर बार और सिक्कों की। बिहार की राजधानी पटना में भी चांदी की बिक्री 600 किलोग्राम तक पहुंची, जो 160 करोड़ रुपये की हुई। दक्षिण भारत में, जहां पारंपरिक ज्वेलरी की डिमांड ज्यादा रहती है, तमिलनाडु और कर्नाटक के बाजारों में हल्के डिजाइन वाली चेन और ब्रेसलेट्स की बिक्री ने बाजार को संभाला।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड ऊंची कीमतों का असर है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में जिक्र है कि उपभोक्ता अब 'कम क्वांटिटी, हाई वैल्यू' की ओर मुड़ रहे हैं। "लोग अब 10 ग्राम की बजाय 2-5 ग्राम की ज्वेलरी खरीद रहे हैं, या फिर डिजिटल गोल्ड में निवेश कर रहे हैं," एक प्रमुख ज्वेलर ने कहा।

पिछले साल से 25% की छलांग

पिछले साल धनतेरस पर सोना-चांदी की कुल बिक्री 48 हजार करोड़ रुपये थी। इस साल के 60 हजार करोड़ का आंकड़ा न सिर्फ 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है, बल्कि आर्थिक रिकवरी का संकेत भी। कोविड के बाद त्योहारों पर खर्च बढ़ा है, और इस बार मिडिल क्लास की बचत क्षमता मजबूत हुई।

कारणों में प्रमुख है वैश्विक अनिश्चितता। यूक्रेन-रूस युद्ध और अमेरिकी सरकार शटडाउन जैसी घटनाओं ने डॉलर को कमजोर किया, जिससे सोने की कीमतें चढ़ीं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ाया, जो खुदरा मांग को प्रेरित करता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, "आरबीआई की खरीदारी ने बाजार को स्थिरता दी, लेकिन उपभोक्ताओं को निवेश के लिए प्रोत्साहित भी किया।

घरेलू स्तर पर, शादियों का मौसम और नरेंद्र मोदी सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल से ज्वेलरी सेक्टर में रोजगार बढ़ा। चांदी की डिमांड में खास उछाल आया, क्योंकि इसकी कीमत सोने से कम होने पर भी निवेश का अच्छा विकल्प बनी। बिजनेस टुडे के अनुसार, चांदी के बार और सिक्कों की बिक्री दोगुनी हो गई।

इसके अलावा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने भूमिका निभाई। अमेजन और फ्लिपकार्ट पर 'गोल्ड स्टेज' सेल से हजारों ग्राम सोना बिका। एक सर्वे में 40 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि वे ऑनलाइन डिस्काउंट के चलते डिजिटल गोल्ड चुन रहे हैं।

कहां-कहां चमका बाजार?

उत्तर भारत में दिल्ली-एनसीआर ने लीड किया, जहां कुल खरीदारी 20 हजार करोड़ रुपये रही। पश्चिम में गुजरात के सूरत डायमंड सिटी में ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स ने घरेलू बिक्री पर फोकस किया। दक्षिण में हैदराबाद के ला ज्वेलरी मार्केट में तेलुगु महिलाओं ने पारंपरिक हार खरीदे। पूर्वोत्तर में असम के गुवाहाटी में चांदी की डिमांड हाई रही, क्योंकि वहां सोने की बजाय चांदी का चलन ज्यादा है।

महिलाओं की भूमिका उल्लेखनीय रही। एक अध्ययन के मुताबिक, 60 प्रतिशत खरीदारी महिलाओं ने की, जो न सिर्फ सजावट के लिए बल्कि फैमिली इन्वेस्टमेंट के रूप में सोना चुन रही हैं। युवा पीढ़ी सस्टेनेबल गोल्ड की ओर आकर्षित हो रही, जहां रिसाइकल्ड मेटल से बनी ज्वेलरी पॉपुलर हो रही।

दीवाली पर और उछाल?

धनतेरस की मजबूत शुरुआत से दीवाली तक का फेस्टिव सीजन 4 लाख करोड़ रुपये का व्यापार कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ सतर्क हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया कि वॉल्यूम में गिरावट अगर बनी रही, तो सेक्टर ग्रोथ 5-7 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है। फिर भी, सरकारी सब्सिडी और जीएसटी कटौती की मांग तेज हो रही। कुल मिलाकर, यह धनतेरस न सिर्फ व्यापारिक सफलता का प्रतीक है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन का भी। ऊंचे दामों के दौर में भी परंपरा और आस्था ने बाजार को चमकाया।

Leave Your Comment