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कॉरपोरेट की पुरानी सोच पर युवाओं का सवाल, नौकरी में अब सिर्फ पैसा नहीं, सुकून भी चाहिए

कॉरपोरेट की पुरानी सोच पर युवाओं का सवाल, नौकरी में अब सिर्फ पैसा नहीं, सुकून भी चाहिए

दुनिया भर में नौकरी और करियर को लेकर युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है। डेलॉयट के एक बड़े वैश्विक सर्वे में सामने आया है कि आज की नई पीढ़ी सफलता और लीडरशिप चाहती तो है, लेकिन पुराने कॉरपोरेट नियमों के हिसाब से नहीं। 44 देशों के 22,500 से ज्यादा युवाओं पर हुए सर्वे में पाया गया कि 76 प्रतिशत जेन-जी और 67 प्रतिशत मिलेनियल्स भविष्य में बड़े पदों पर पहुंचना चाहते हैं। लेकिन सिर्फ 6 प्रतिशत लोग ही इसे जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य मानते हैं। यानी युवा अब सिर्फ पद और ताकत के पीछे नहीं भाग रहे।

तनाव वाली नौकरी अब मंजूर नहीं
सर्वे में सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि युवा लीडर बनना चाहते हैं, लेकिन बर्नआउट और मानसिक दबाव की कीमत पर नहीं। लगभग आधे युवाओं का कहना है कि आज लीडरशिप का मतलब जरूरत से ज्यादा तनाव और निजी जीवन खत्म हो जाना बन गया है। कई लोगों ने अत्यधिक जिम्मेदारी और वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ने को बड़ी समस्या बताया। नई पीढ़ी का साफ संदेश है कि सिर्फ बड़ा पैकेज और बड़ी कुर्सी काफी नहीं, उन्हें बेहतर माहौल और मानसिक शांति भी चाहिए।

महंगाई ने बदले जिंदगी के फैसले
सर्वे में आर्थिक दबाव भी बड़ी चिंता बनकर सामने आया। लगातार पांचवें साल महंगाई और बढ़ते खर्च युवाओं की सबसे बड़ी परेशानी रहे। स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में युवा महीने की पूरी सैलरी खर्च होने वाले चक्र में फंसे हुए हैं। इसका असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ रहा है। 55 प्रतिशत जेन-जी और 52 प्रतिशत मिलेनियल्स शादी, परिवार या नया कारोबार शुरू करने जैसे बड़े फैसले टाल रहे हैं। कई युवाओं को लगता है कि वे जिंदगी में अपना घर भी नहीं खरीद पाएंगे।

एआई बना नया साथी
जहां पुरानी पीढ़ी एआई को नौकरी के लिए खतरा मानती है, वहीं युवा इसे अवसर की तरह देख रहे हैं। सर्वे के अनुसार लगभग 74 प्रतिशत युवा रोजमर्रा के काम में एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे सिर्फ काम तेजी से करने के लिए नहीं, बल्कि करियर सलाह और तनाव कम करने के लिए भी एआई की मदद ले रहे हैं। हालांकि बड़ी संख्या में युवाओं का मानना है कि कंपनियां तकनीकी बदलावों के हिसाब से अब भी पीछे चल रही हैं और कर्मचारियों को सही प्रशिक्षण नहीं मिल रहा।

कंपनियों को बदलनी होगी सोच
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट युवाओं की महत्वाकांक्षा खत्म होने की नहीं, बल्कि उनकी सोच बदलने की कहानी है। अब कर्मचारी सिर्फ घंटों काम करने वाली संस्कृति नहीं चाहते। वे ऐसे कार्यस्थल चाहते हैं जहां उनके काम के साथ-साथ उनकी सेहत और निजी जिंदगी को भी महत्व दिया जाए। आने वाले समय में कंपनियों को अपनी पुरानी नीतियां बदलनी पड़ सकती हैं, क्योंकि नई पीढ़ी अब अपनी शर्तों पर काम करना चाहती है।

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