न्यूजप्लस डेस्क। राजेश द्विवेदी
66 साल बाद भारतीय क्रिकेट टीम अपने घर में सात मैचों में पांच मैच हार चुकी है और हेड कोच गौतम गंभीर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। टीम की रनों के लिहाज से गुवाहाटी टेस्ट में बुधवार को 408 हुई हार सबसे बड़ी है। ऊपर से गंभीर का तुर्रा है कि टेस्ट में बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की जरुरत नहीं है जबकि हकीकत यह है कि गंभीर ने टीम को प्रयोगशाला बना दिया है इसलिए हार पर हार हो रही है।
गंभीर बेलौस होकर यह कह रहे हैं कि उनके भविष्य का फैसला बीसीसीआई को करना है तो क्या उन्हें बोर्ड से कुछ संकेत मिले हैं, यह तो वही जाने लेकिन विशेषज्ञ कह रहे हैं कि टेस्ट क्रिकेट ही असल खेल है। उसमें प्रयोग किए जाएंगे तो नुकसान उठाना ही पड़ता है। घर पर बार-बार हारना माना जाता है कि टीम में अंदरखाने कुछ गंभीर बिन्दु तैर रहे हैं, जिनका जवाब गंभीर के साथ सेलेक्टर्स को देना होगा। इतनी बुरी हार खिलाड़ि़यों के प्रदर्शन से नहीं प्रयोगों के कारण होती है क्योंकि टीम में वास्तविक टेलेंट है, बस प्रयोग करने का तरीका होना चाहिए। गंभीर से सवाल क्यों नहीं किए जा रहे हैं कि राहुल द्रविड ने टीम इंडिया को कितनी बुलंदी दी? सौम्य रास्ते निश्चित सफलता देते हैं पर जड़ता भरे रास्ते मुश्किलों का जंजाल देते रहते हैं।



