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दिल्ली-NCR और पंजाब में बाढ़: भारी बारिश ने मचाई तबाही

दिल्ली-NCR और पंजाब में बाढ़: भारी बारिश ने मचाई तबाही

दिल्ली-एनसीआर में सितंबर 2025 की शुरुआत से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 3 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर के लिए रेड अलर्ट जारी किया था, जिसमें भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की चेतावनी दी गई थी। यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान 205.33 मीटर को पार कर 207 मीटर तक पहुंच गया।

दिल्ली के निचले इलाकों जैसे यमुना खादर, मयूर विहार फेज-1, कालिंदी कुंज, विश्वकर्मा कॉलोनी, और निगम बोध घाट में बाढ़ का पानी घुस गया है। सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं, और कई जगहों पर घुटनों तक पानी भर गया है। मोनेस्ट्री मार्केट में दुकानदारों ने बाढ़ की आशंका के चलते अपनी दुकानें खाली कर दी हैं, और बाजार अगले चार-पांच दिनों तक बंद रहने की संभावना है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने दक्षिण-पूर्व दिल्ली के मदनपुर खदर और विश्वकर्मा कॉलोनी में बचाव अभियान तेज कर दिया है।

हथिनीकुंड और वजीराबाद बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। दिल्ली में सड़कों पर जलभराव, ट्रैफिक जाम, और कई जगहों पर पुलों को बंद करने की नौबत आ गई है। पुराने लोहे के पुल को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने निचले इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहरा दिया है।

नोएडा और गाजियाबाद में हालात

नोएडा और गाजियाबाद में भी भारी बारिश ने तबाही मचाई है। नोएडा के सेक्टर-128, सेक्टर-167, हैबतपुर, चोटपुर, बहलोलपुर, छिजारसी, और चकशाहबेरी जैसे इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। खेत और झुग्गियां जलमग्न हो गई हैं, और कई सड़कें पानी में डूब गई हैं। गाजियाबाद में दिल्ली-मेरठ हाईवे और एनएच-9 विजय नगर अंडरपास पर जलभराव के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

नोएडा और गाजियाबाद में प्रशासन ने 3 सितंबर को सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ग्रेटर नोएडा के छह गांव हिंडन नदी की बाढ़ की चपेट में हैं, और 800 से 1,000 लोगों को राहत केंद्रों में सुरक्षित किया गया है।

पंजाब में भयंकर बाढ़

पंजाब में बाढ़ की स्थिति 1988 के बाद सबसे भयंकर बताई जा रही है। राज्य के 23 में से 12 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं, और 1,655 गांव जलमग्न हो गए हैं। सतलुज, ब्यास, रावी, और घग्गर नदियां उफान पर हैं, जिसके कारण 1.75 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलें बर्बाद हो गई हैं। अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है, और 3.55 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फाजिल्का, कपूरथला, और होशियारपुर जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पठानकोट के केजुलटी जिले में सबसे अधिक तबाही हुई है, जहां कई गांवों में 5 से 15 फीट तक पानी भरा हुआ है। सेना और NDRF की टीमें युद्धस्तर पर बचाव कार्य में जुटी हैं, और हेलीकॉप्टर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से 60,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है। एनडीआरएफ, सेना, और खालसा एड जैसे एनजीओ राहत कार्य में जुटे हैं। 77 रिलीफ कैंप स्थापित किए गए हैं, जहां 4,729 लोग शरण लिए हुए हैं। गुरदासपुर में रावी नदी के कटाव ने भारी नुकसान पहुंचाया है, और कई घर और दुकानें नष्ट हो गई हैं।

बाढ़ के कारण

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल मॉनसून की अनियमितता और क्लाइमेट चेंज के कारण बारिश की तीव्रता बढ़ी है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव वाले क्षेत्र और चक्रवातीय परिसंचरण ने नमी को उत्तर-पश्चिम भारत की ओर धकेला है। इसके अलावा, अगस्त 2025 में पांच पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे, जो सामान्यतः मॉनसून के महीनों में कम देखे जाते हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश ने नदियों के जलस्तर को और बढ़ा दिया, जिसके कारण पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई।

फ्लडप्लेन्स पर अतिक्रमण, खराब ड्रेनेज सिस्टम, और डैमों से पानी छोड़े जाने ने भी बाढ़ की स्थिति को और गंभीर किया है। IPCC की रिपोर्ट के अनुसार, हिमालय में बाढ़ की आवृत्ति पिछले 60 वर्षों में दोगुनी हो गई है।

राहत और बचाव कार्य

दिल्ली-एनसीआर और पंजाब में प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। NDRF और सेना की टीमें प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं। जम्मू के अखनूर सेक्टर में BSF ने हेलीकॉप्टर से 45 लोगों को सुरक्षित निकाला, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। दिल्ली में मथुरा रोड पर ट्रैफिक जाम और जलभराव के कारण यातायात को नियंत्रित करने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।

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