पंजाब में अगस्त 2025 से शुरू हुई भयावह बाढ़ ने राज्य के 9 जिलों में व्यापक तबाही मचाई है। सतलुज, ब्यास और रावी नदियों के उफान और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई है। इस प्राकृतिक आपदा ने 29 लोगों की जान ले ली है, जबकि तीन लोग अभी भी लापता हैं।
बाढ़ ने पंजाब के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई सड़कें, पुल और बिजली आपूर्ति प्रणालियां प्रभावित हुई हैं। अमृतसर के अजनाला क्षेत्र में रावी नदी के पानी ने कई गांवों को टापू में बदल दिया है। कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी में ब्यास नदी के किनारे की बांध टूटने से 50,000 एकड़ धान की फसल खतरे में है। लगभग 2.56 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, और 1,044 से अधिक गांव जलमग्न हो चुके हैं। खेती, पशुधन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
कृषि क्षेत्र को सबसे बड़ा झटका लगा है, क्योंकि धान की फसल, जो कटाई से कुछ हफ्ते दूर थी, बड़े पैमाने पर नष्ट हो गई है। सरकार ने फसल नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी का आदेश दिया है, और मुआवजे की घोषणा की गई है। पशुधन को भी भारी नुकसान हुआ है, लेकिन सटीक आंकड़े अभी तक उपलब्ध नहीं हैं।
9 जिलों को सबसे अधिक प्रभावित
- गुरदासपुर: 323 गांव प्रभावित, 1.45 लाख लोग प्रभावित।
- कपूरथला: 107 गांव जलमग्न, 28,714 एकड़ कृषि भूमि क्षतिग्रस्त।
- फिरोजपुर: 101 गांव प्रभावित, 24,015 लोग प्रभावित, 26,703 एकड़ फसल बर्बाद।
- पठानकोट: 89 गांव प्रभावित, 6 मौतें, 3 लोग लापता।
- होशियारपुर: 85 गांव प्रभावित, 7 मौतें, 13,064 एकड़ फसल नष्ट।
- फाजिल्का: 52 गांव प्रभावित, 41,099 एकड़ कृषि भूमि डूबी।
- तरनतारन: 45 गांव प्रभावित, 24,532 एकड़ फसल क्षतिग्रस्त।
- अमृतसर: 15 गांव प्रभावित, 35,000 लोग प्रभावित, 23,000 एकड़ फसल नष्ट।
- मोगा: 35 गांव प्रभावित।
कुल मिलाकर, 96,061 हेक्टेयर (लगभग 2.32 लाख एकड़) कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में आई है, जिसमें धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। गुरदासपुर में नुकसान का अनुमान 30,000 एकड़ से अधिक है, हालांकि सटीक आंकड़े अभी तक उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि जलस्तर अधिक होने के कारण सर्वेक्षण में देरी हो रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 29 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से सबसे अधिक 6 मौतें पठानकोट में दर्ज की गई हैं। अमृतसर, बरनाला, होशियारपुर, लुधियाना, मनसा, रूपनगर: प्रत्येक में 3 मौतें। बठिंडा, गुरदासपुर, पटियाला, मोहाली, संगरूर: प्रत्येक में 1 मौत। पठानकोट में तीन लोग लापता हैं, और माना जा रहा है कि वे बाढ़ में बह गए। मृत्यु के कारणों में डूबना, मकान ढहना और बिजली का करंट लगना शामिल हैं।
राहत और बचाव कार्य
पंजाब सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सेना, वायुसेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पंजाब पुलिस ने राहत और बचाव कार्यों में दिन-रात जुटे हुए हैं। अब तक 15,688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जिनमें से 5,549 गुरदासपुर, 3,321 फिरोजपुर, और 2,049 फाजिल्का से हैं। 7,144 लोग 129 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं, जहां भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। 20 NDRF टीमें, 10 सेना कॉलम, और 35 हेलीकॉप्टर बचाव कार्यों में लगे हैं। चिनूक हेलीकॉप्टर और उभयचर वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। 138 नए चिकित्सा अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। सियालकोट और जालंधर के कार्तारपुर गांव में चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां त्वचा और पेट से संबंधित बीमारियों का इलाज किया जा रहा है। राशन किट, पशु चारा, स्वच्छता किट, और तिरपाल वितरित किए जा रहे हैं। फिरोजपुर में हुसैनीवाला रिट्रीट समारोह की मुख्य सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण मरम्मत कार्य जारी है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस आपदा को "पंजाब का हाल के इतिहास में सबसे खराब बाढ़" करार दिया है और प्रभावित लोगों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास का वादा किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 60,000 करोड़ रुपये के लंबित राज्य निधि की मांग की है। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मान से बात की और केंद्र से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
राज्य सरकार ने सभी स्कूलों, कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को 3 सितंबर तक बंद रखने का आदेश दिया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, जिनमें आप, भाजपा, कांग्रेस और शिअद शामिल हैं, ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और अपने कार्यकर्ताओं को राहत कार्यों में सहायता करने का निर्देश दिया।
पड़ोसी क्षेत्रों पर प्रभाव
पंजाब की बाढ़ का असर पड़ोसी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत पर भी पड़ा है, जहां भारत के बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण रावी, सतलुज और चिनाब नदियों में बाढ़ आई है। पाकिस्तान में 33 लोगों की मौत हुई है, और 2 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। 760,000 लोग और 516,000 पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पंजाब के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। पठानकोट, होशियारपुर और रूपनगर के लिए येलो अलर्ट, जबकि मोहाली, रूपनगर, शहीद भगत सिंह नगर और होशियारपुर के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। इससे बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।



