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पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर फायरिंग: गोलीबारी में 12 अफगान नागरिकों की मौत

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर फायरिंग: गोलीबारी में 12 अफगान नागरिकों की मौत

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवादित डुरंड लाइन पर तनाव चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार रात को शुरू हुई तीव्र गोलीबारी और तोपखाने की गोलाबारी में अफगानिस्तान के कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक जिले में कम से कम 12 नागरिक मारे गए, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों में 80 से ज्यादा महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। अफगान तालिबान सरकार ने पाकिस्तानी सेना पर 'प्रकाश और भारी हथियारों' से हमला करने का आरोप लगाते हुए इसे 'सीमा उल्लंघन' करार दिया है, जबकि पाकिस्तान ने तालिबान को ही पहले गोलीबारी शुरू करने का दोषी ठहराया।

यह घटना पिछले हफ्ते के घातक संघर्षों की याद दिलाती है, जब दोनों पक्षों ने दर्जनों सैनिकों की मौत की दावा किया था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन सीमा पर व्यापारिक रास्ते बंद होने से हजारों लोग फंस गए हैं।

रातभर चली गोलीबारी

अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि सुबह-सुबह पाकिस्तानी सेना ने स्पिन बोल्डक जिले में अफगान सीमा पर हमला बोला। "पाकिस्तानी सेना ने हल्के और भारी हथियारों से हमला किया, जिसमें 12 नागरिक शहीद हो गए और 100 से ज्यादा घायल हुए," मुजाहिद ने लिखा। उन्होंने दावा किया कि अफगान सेना ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचाया, कई चौकियां कब्जे में लीं और हथियार व टैंक जब्त किए।

दूसरी ओर, पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि तालिबान ने चमन जिले की सीमा पर पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर पहले हमला किया, जिसमें चार नागरिक घायल हुए। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने कहा, "हमारी सेना ने आत्मरक्षा में जवाब दिया। तालिबान और उनके सहयोगी आतंकवादियों को भारी क्षति पहुंचाई गई।" चश्मदीदों के अनुसार, स्पिन बोल्डक-चमन सीमा पर रातभर गोलियां चलीं, जिसमें ड्रोन हमलों की भी खबरें हैं। स्थानीय अस्पतालों में घायलों की संख्या बढ़ रही है, और कई परिवार सीमा पार भागने की कोशिश कर रहे हैं।

क्यों भड़का विवाद?

यह झड़पें 12 अक्टूबर को हुए बड़े संघर्ष की कड़ी हैं, जब अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी हवाई हमलों का जवाब देते हुए सीमा पर हमला किया था। अफगानिस्तान ने दावा किया था कि पाकिस्तान ने काबुल और पूर्वी अफगानिस्तान में हवाई हमले किए, जिसमें नागरिक मारे गए। पाकिस्तान ने इन्हें 'आतंकवादियों के ठिकानों' पर हमले बताया, जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े हैं। टीटीपी पर पाकिस्तान में बढ़ते हमलों का आरोप है, और इस्लामाबाद का कहना है कि अफगानिस्तान इन आतंकियों को पनाह दे रहा है।

पिछले कुछ महीनों में सीमा पर छोटे-मोटे संघर्ष बढ़े हैं। जनवरी 2025 में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर 'आतंकवादियों को तैनात करने' का आरोप लगाया था, जबकि अप्रैल में पाकिस्तानी सीमा गार्डों ने 54 'आतंकवादियों' को मार गिराया। विकिपीडिया के अनुसार, 2024 से अब तक ऐसे संघर्षों में सैकड़ों की मौत हो चुकी है। डुरंड लाइन, जो 1893 में ब्रिटिश काल में खींची गई थी, अफगानिस्तान द्वारा मान्य नहीं है और यह दोनों देशों के बीच पुराना विवाद है।

सीमा बंद, व्यापार ठप, मानवीय संकट

झड़पों के बाद चमन-स्पिन बोल्डक सहित प्रमुख सीमा क्रॉसिंग बंद हो गए हैं, जिससे अफगानिस्तान को पाकिस्तान से आने वाले भोजन, ईंधन और दवाओं की आपूर्ति रुक गई। अफगानिस्तान, जो भूमिबद्ध देश है, 80% व्यापार पाकिस्तान पर निर्भर है। हजारों अफगान शरणार्थी, जो पाकिस्तान में रहते हैं, फंस गए हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि सीमा क्षेत्रों से लोग भाग रहे हैं, और स्कूल-बाजार बंद हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तीव्र है। कतर और सऊदी अरब ने दोनों पक्षों से अपील की है, जबकि चीन ने अपने नागरिकों और निवेशों की सुरक्षा की मांग की। रूस ने संयम बरतने को कहा, और अमेरिका ने चिंता जताई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ा सकता है, खासकर भारत के लिए, जो तालिबान के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा है।

शांति वार्ता की उम्मीद

अफगानिस्तान ने कहा है कि अगर पाकिस्तान फिर सीमा उल्लंघन करेगा, तो 'कड़ा जवाब' दिया जाएगा। पाकिस्तान ने भी अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान सरकार की कमजोर अर्थव्यवस्था और टीटीपी का बढ़ता खतरा दोनों देशों को बातचीत के लिए मजबूर कर सकता है। हाल ही में सऊदी अरब और कतर की मध्यस्थता से 12 अक्टूबर के संघर्ष रुके थे, लेकिन नई झड़पें उम्मीदों पर पानी फेर रही हैं।

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