राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर के निकट मनोहरपुर क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा घटित हो गया। उत्तर प्रदेश से मजदूरी के सिलसिले में आए सैकड़ों श्रमिकों से भरी एक स्लीपर बस हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गई, जिससे करंट की चपेट में आकर वाहन में भीषण आग लग गई। छत पर लादे गए एलपीजी सिलेंडरों के धमाके ने हालात को और भयानक बना दिया। इस दुर्घटना में तीन मजदूरों की मौके पर ही जलकर असमय मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद मौके पर सन्नाटा पसर गया, जहां धुएं की लकीरें और जली हुई बस का कंकाल चीख-चीखकर सुरक्षा मानकों की पोल खोल रहा है।
यह हादसा जयपुर शहर से मात्र 50-62 किलोमीटर दूर मनोहरपुर के टोडी इलाके में सुबह करीब 8 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यूपी नंबर वाली यह स्लीपर कोच बस टोडी स्थित एक ईंट भट्ठे पर मजदूरों को उतारने के लिए जा रही थी। बस में करीब 50-65 श्रमिक सवार थे, जो उत्तर प्रदेश के बरेली और पीलीभीत जिलों से राजस्थान पहुंचे थे। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे, जो सपनों के पीछे भागे थे लेकिन मौत की आग में भस्म हो गए। अचानक बस का ऊपरी हिस्सा 11,000 किलोवोल्ट की हाईटेंशन लाइन को छू गया। तार टूटकर बस पर गिर पड़ी, जिससे तीव्र स्पार्किंग हुई और करंट पूरी बस में दौड़ने लगा। इससे छत पर बंधे आधा दर्जन से अधिक एलपीजी गैस सिलेंडर, मोटरसाइकिलें और घरेलू सामान में आग भड़क उठी। कुछ ही सेकंडों में लगातार तीन जोरदार धमाके हुए, जो सिलेंडरों के फटने से थे। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि बस आग का गोला बन गई, और यात्रियों के चीखने की आवाजें हवा में गूंजने लगीं।
मृतकों में 50 वर्षीय नसीम पुत्र अली हुसैन और उनकी 20 वर्षीय बेटी सहीनम की पहचान हो चुकी है। दोनों बरेली जिले के निवासी थे और मजदूरी के लिए परिवार के साथ राजस्थान आए थे। तीसरे मृतक की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि दो की मौत करंट लगने से हुई, जबकि एक ने जलकर दम तोड़ा। घायलों में नाजमा पत्नी नसीम, सितारा पत्नी नूर मोहम्मद, अजहर पुत्र नसीम, अल्ताफ पुत्र नूर मोहम्मद और नहीम पत्नी नवाब हुसैन जैसे नाम शामिल हैं। इनमें से पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी को प्राथमिक उपचार के बाद शाहपुरा उपजिला अस्पताल से जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां बर्न यूनिट में विशेष टीम तैनात कर दी गई है, और इलाज मुफ्त चल रहा है। एक घायल मजदूर ने बताया, "हम बस में सो रहे थे। अचानक चीखें गूंजीं। मैंने खिड़की तोड़कर कूद लिया, लेकिन मेरी पत्नी अंदर फंस गई। सिलेंडर फटने की आवाज से लग रहा था जैसे बम गिरा हो।"
दो सिलेंडर फटे, जिससे आग फैली
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन फौरन सक्रिय हो गया। जयपुर कलेक्टर जितेंद्र सोनी स्वयं मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों का जायजा लिया। सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस की संयुक्त टीम ने आग पर काबू पाने में घंटों जद्दोजहद की। ग्रामीणों ने बाल्टियों और स्थानीय पाइपों से पानी डालकर मदद की, लेकिन सिलेंडरों के धमाकों से सभी दूर भागने को मजबूर हो गए। कुल 25-39 यात्रियों को सुरक्षित बचाया गया। उपमुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा, "यह बेहद दुखद है। बस हाईटेंशन तार के नीचे से गुजर रही थी जब तार टूट गया। दो सिलेंडर फटे, जिससे आग फैली। घायलों का पूरा इलाज सुनिश्चित किया जाएगा और जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।" राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, "राजस्थान में लगातार हो रहे हादसे चिंताजनक हैं। आमजन की जान पर बन रही है, सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए। शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदनाएं।"
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस ओवरलोड थी, और छत पर सिलेंडर लादना सुरक्षा नियमों का घोर उल्लंघन है। स्थानीय ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाईटेंशन तारों की ऊंचाई मानक से कम है, और कई शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक ग्रामीण ने बताया, "यह इलाका ईंट भट्टों से भरा है। रोज सैकड़ों बसें गुजरती हैं, लेकिन तारों को ऊंचा करने की मांग सालों से लंबित है।" पुलिस बस ड्राइवर और मालिक से पूछताछ कर रही है, जबकि बिजली कंपनी को नोटिस जारी किया गया है।
15 दिन में 5वां बड़ा हादसा
यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का आईना है। पिछले 15 दिनों में ही देश में बस से जुड़े पांच बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें 70 से अधिक मौतें हुई हैं। 14 अक्टूबर को राजस्थान के जैसलमेर के थैयत गांव के पास एक एसी स्लीपर बस में शॉर्ट सर्किट से आग लगी, जिसमें 20-27 लोग जिंदा जल गए। मात्र एक दिन बाद, 15 अक्टूबर को राजस्थान में ही एक अन्य बस हादसे में 20 मौतें हुईं। 24 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के कुरनूल में एक बेंगलुरु बाउंड बस मोटरसाइकिल से टकराई, जिससे ईंधन टैंक फट गया और आग लगने से 20-25 यात्रियों की जलकर मौत हो गई। इसके अलावा, 7 अक्टूबर को जयपुर-अजमेर हाईवे पर एलपीजी ट्रक में आग लगने से यातायात ठप हो गया, हालांकि मौतें कम रहीं। ये हादसे निजी बसों की खराब रखरखाव, ओवरलोडिंग, सुरक्षा उपकरणों की कमी और ड्राइवरों की लापरवाही को उजागर करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल फोन और सिलेंडर जैसे ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी आग को और भयंकर बना देती है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए परिवहन विभाग को बसों की सुरक्षा जांच के सख्त निर्देश दिए हैं। लेकिन सवाल वही है- कागजी कार्रवाई से कब तक जिंदगियां बचेंगी? श्रमिकों की यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि विकास की दौड़ में सुरक्षा को कभी पीछे न छोड़ें। मृतकों की आत्मा को शांति मिले और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना।



