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फतेहपुर मंदिर बनाम मकबरा विवाद: विधानसभा में गूंजा मुद्दा, जानें किसने क्या कहा

फतेहपुर मंदिर बनाम मकबरा विवाद: विधानसभा में गूंजा मुद्दा, जानें किसने क्या कहा

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में नवाब अब्दुल समद के मकबरे को लेकर मंदिर बनाम मकबरा विवाद ने विधानसभा में जोरदार चर्चा का रूप लिया। इस मुद्दे को समाजवादी पार्टी (सपा) ने विधानसभा सत्र के दूसरे दिन उठाया, जिसके बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बयानबाजी हुई। यह विवाद अब सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है।

फतेहपुर के आबूनगर रेडइया मोहल्ले में स्थित 200 साल पुराने मकबरे को लेकर हिंदू संगठनों और बीजेपी नेताओं ने दावा किया है कि यह स्थल वास्तव में भगवान शिव और श्रीकृष्ण का प्राचीन मंदिर है। बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने इसे "ठाकुरद्वारा मंदिर" बताते हुए 11 अगस्त को वहां पूजा-पाठ और हवन का ऐलान किया था। इसके जवाब में, सोमवार को सैकड़ों की संख्या में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मकबरे पर पहुंचे, बैरिकेड तोड़कर परिसर में घुस गए, भगवा झंडा फहराया, और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस घटना के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग भी मौके पर पहुंचे, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक और पथराव हुआ। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और 10 लोगों को नामजद करते हुए 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

विधानसभा में चर्चा

मंगलवार को विधानसभा सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने योगी सरकार पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया और इस मामले पर तत्काल बहस की मांग की। पांडेय ने कहा, "प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। मकबरे पर हमला कर और माहौल बिगाड़कर सरकार समाज को बांटना चाहती है।" उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

इसके जवाब में संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा, "इस घटना में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। हम इसका खंडन करते हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।" खन्ना ने बताया कि 10 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 10 थानों की पुलिस और प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC) तैनात किए गए हैं।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विपक्ष की नारेबाजी के बीच शांति बनाए रखने की अपील की और आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई होगी। हालांकि, सपा विधायकों ने सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन में भारी हंगामा किया।

किसने क्या कहा?

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस घटना को बीजेपी की साजिश करार देते हुए कहा, "जब भी बीजेपी की पोल खुलने लगती है, वह सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करती है। फतेहपुर की घटना इसका ताजा उदाहरण है। जनता अब इनकी चाल को समझ चुकी है।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "देखना होगा कि दोषियों की पहचान लखनऊ के ड्रोन करेंगे या दिल्ली वालों के ड्रोन।

भाजपा उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, "सपा और कांग्रेस की 'फूट डालो, हुकूमत करो' नीति ने देश को दशकों तक बांटा है। बीजेपी का संकल्प है तुष्टिकरण किसी का नहीं, संतुष्टिकरण सबका। हमने साढ़े आठ साल में दंगों पर पूरी तरह नियंत्रण किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया, हालांकि उनका बयान सधा हुआ था। उन्होंने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की।

मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, "फतेहपुर ऐतिहासिक स्थान है और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लोगों को मंदिर-मस्जिद के विवाद से ऊपर उठकर सामाजिक सौहार्द बनाए रखना चाहिए।

दोनों पक्षों के दावे

हिंदू संगठन और बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल का कहना है कि मकबरे में कमल के फूल, त्रिशूल, और अन्य हिंदू प्रतीकों के निशान मौजूद हैं, जो इसे प्राचीन मंदिर होने का सबूत देते हैं। उनका दावा है कि यह स्थान हजारों साल पुराना शिव और श्रीकृष्ण मंदिर था, जिसे बाद में मकबरे में बदल दिया गया।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मकबरा 200 साल पुराना है और सरकारी अभिलेखों में "मकबरा मांगी" के रूप में दर्ज है। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के महासचिव तलहा आमिर ने दावा किया कि मकबरे का आधिकारिक मुतवल्ली मोहम्मद अनीश है। मुस्लिम संगठनों ने बीजेपी और हिंदू संगठनों पर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है।

प्रशासन की कार्रवाई

जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल और PAC तैनात किए हैं। फतेहपुर के एडीएम वित्त एवं राजस्व अविनाश त्रिपाठी ने कहा कि यह स्थल मंदिर है या मकबरा, इसका निर्धारण अभिलेखों के आधार पर होगा। पुलिस ने मकबरे पर लगाए गए भगवा झंडे को हटा दिया है और क्षेत्र में शांति बहाल करने का दावा किया है।

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