अफगानिस्तान की सीमा से सटे उत्तर वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना के एक कैंप पर शुक्रवार को हुए आत्मघाती हमले में सात सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 13 अन्य घायल हो गए। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि की है, जो इस्लामाबाद और काबुल के बीच नाजुक युद्धविराम के बीच हुई है। यह हमला तब हुआ जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था, और यह संभावित रूप से शांति प्रक्रिया को पटरी से उतार सकता है।
सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि मिर अली क्षेत्र में स्थित खद्दी मिलिट्री कैंप की दीवार पर एक आतंकी ने विस्फोटक से लदी गाड़ी चढ़ा दी। इसके साथ ही दो अन्य हमलावर कैंप में घुसने का प्रयास कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षाबलों ने गोली मारकर मार गिराया। विस्फोट इतना जोरदार था कि कैंप की दीवार ध्वस्त हो गई और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने हमलावर हेलीकॉप्टर तैनात कर दिए, और इलाके में भारी गोलीबारी जारी रही।
पाकिस्तानी सेना ने अभी तक इस घटना पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन पांच वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने गोपनीय रूप से रॉयटर्स को जानकारी दी। घायलों को पेशावर के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
हमले की जिम्मेदारी
इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान तालिबान (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या टीटीपी) ने ली है। संगठन के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि उनके 'खालिद बिन वलीद सुसाइड यूनिट' और 'तहरीक तालिबान गुलबहार' ने यह संयुक्त कार्रवाई की। टीटीपी ने दावा किया कि यह हमला पाकिस्तानी सेना की अफगानिस्तान में की गई हवाई हमलों का बदला है। वीडियो संदेश में हमलावरों को 'शहीद' बताते हुए संगठन ने पाकिस्तानी सरकार को चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयां जारी रहेंगी जब तक 'अमेरिकी समर्थित कठपुतली सरकार' सत्ता में है।
पाक-अफगान तनाव का नया अध्याय
यह हमला पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव की आग में घी डालने वाला है। अक्टूबर की शुरुआत से दोनों देशों के बीच सीमा पर भारी झड़पें हो रही थीं, जिसमें पाकिस्तानी सेना ने अफगान क्षेत्र में हवाई हमले किए थे। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान मिट्टी से पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को पनाह दी जा रही है, खासकर टीटीपी को। इन हमलों में दर्जनों अफगान नागरिक मारे गए, जिसके बाद तालिबान ने पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराने और सीमा चौकियों पर कब्जा करने का दावा किया।
बुधवार शाम को सऊदी अरब और कतर की मध्यस्थता से 48 घंटे का युद्धविराम घोषित किया गया था, जो शुक्रवार दोपहर तक प्रभावी था। हालांकि, इस हमले ने युद्धविराम की नाजुकता को उजागर कर दिया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को कहा, "हमने अफगानिस्तान के साथ धैर्य खो दिया है। कई आतंकी हमलों के बाद हमने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन बातचीत के लिए तैयार हैं।" दूसरी ओर, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस्लामाबाद अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिए झूठ फैला रहा है और आईएसआईएस से जुड़े आतंकियों को शरण दे रहा है।
क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष दशकों पुरानी दुर्गा लाइन सीमा विवाद से जुड़ा है। 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान की सत्ता में वापसी ने पाकिस्तान के लिए नई चुनौतियां पैदा की हैं। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान में टीटीपी के हमले दोगुने हो गए हैं, जिसमें सैकड़ों नागरिक और सैनिक मारे गए।
क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
इस हमले से न केवल पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंध प्रभावित होंगे, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है। सऊदी अरब और कतर ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, जबकि भारत और चीन जैसे पड़ोसी देश चिंता जता रहे हैं। कूटनीतिक स्रोतों के अनुसार, दोहा में होने वाली संभावित वार्ता अब और जटिल हो गई है।
मानवाधिकार संगठनों ने हमले की निंदा की है और दोनों सरकारों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उत्तर वजीरिस्तान जैसे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों परिवार पहले से ही विस्थापित हैं, और यह घटना उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकती है।



