देश में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा है कि भारत में ऐसी एथेनॉल आधारित चूल्हा तकनीक विकसित की गई है, जो एलपीजी गैस सिलेंडर के मुकाबले काफी सस्ती पड़ सकती है। गडकरी के मुताबिक पानी और एथेनॉल के विशेष मिश्रण से ऐसी लौ तैयार की जा सकती है, जो खाना पकाने के लिए उपयोगी हो। उनके इस बयान के बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले समय में रसोई गैस का विकल्प तैयार हो सकता है और क्या इससे आम परिवारों का खर्च कम होगा।
क्या है एथेनॉल चूल्हे की तकनीक
एथेनॉल एक ज्वलनशील ईंधन है, जिसका उपयोग पहले से ही कई क्षेत्रों में किया जा रहा है। वर्तमान समय में उपलब्ध एथेनॉल चूल्हों में आमतौर पर 70 से 90 प्रतिशत तक एथेनॉल का इस्तेमाल होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक बर्नर और बेहतर तकनीक के जरिए एथेनॉल आधारित चूल्हे साफ और स्थिर लौ दे सकते हैं। यही वजह है कि इस तकनीक को भविष्य के वैकल्पिक ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। यदि इसका बड़े स्तर पर उपयोग शुरू होता है, तो यह घरेलू रसोई के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।
एलपीजी पर निर्भरता हो सकती है कम
भारत में गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से एथेनॉल का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। सरकार पहले से ही पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में एथेनॉल का उपयोग रसोई ईंधन के रूप में बढ़ने से एलपीजी आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे देश को विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हुई तो एथेनॉल चूल्हे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एक किफायती विकल्प बन सकते हैं।
सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि एथेनॉल चूल्हों को लेकर कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि एथेनॉल की लौ कई बार दिन के उजाले में स्पष्ट दिखाई नहीं देती, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा भंडारण और उपयोग के दौरान विशेष सावधानी बरतनी होगी। इसलिए इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाना जरूरी माना जा रहा है। सरकार और तकनीकी संस्थानों के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही होगी कि कम लागत के साथ सुरक्षित उपयोग भी सुनिश्चित किया जाए।
भविष्य में बदल सकती है रसोई की तस्वीर
एथेनॉल आधारित चूल्हे अभी शुरुआती चर्चा के दौर में हैं, लेकिन इन्हें भविष्य के ऊर्जा विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। अगर तकनीक सफल रहती है और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का समाधान निकलता है, तो आने वाले वर्षों में रसोई गैस के साथ एक नया विकल्प लोगों के सामने हो सकता है। इससे न केवल घरेलू खर्च कम होगा, बल्कि स्वदेशी ईंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।
