जिम या दौड़ के बाद शरीर पसीने से भीग जाए तो कई लोग मान लेते हैं कि आज खूब फैट घट गया। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। पसीना शरीर का ठंडा रखने वाला प्राकृतिक सिस्टम है। शरीर गर्म होता है तो पसीना निकलता है और उसके सूखने से तापमान नियंत्रित रहता है। इसलिए ज्यादा पसीना आने का सीधा मतलब ज्यादा फैट कम होना नहीं होता।
वजन कम दिखे तो भी सावधान
वर्कआउट के बाद मशीन पर वजन थोड़ा कम दिख सकता है। यह देखकर लोग खुश हो जाते हैं कि फैट घट गया। असल में यह ज्यादातर शरीर से निकला पानी होता है। पसीने के साथ पानी और नमक बाहर निकलते हैं। पानी पीने और खाना खाने के बाद वजन फिर सामान्य हो सकता है। इसलिए सिर्फ एक दिन के वजन से फैट लॉस का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।
फैट आखिर कम कब होता है
फैट तब कम होता है जब शरीर खर्च करने के लिए जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। आसान भाषा में कहें तो जब आप खाने से मिलने वाली कैलोरी से ज्यादा कैलोरी रोजमर्रा की गतिविधियों और एक्सरसाइज में खर्च करते हैं तब शरीर धीरे-धीरे फैट का उपयोग करने लगता है। चलना दौड़ना साइकिल चलाना और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग इसमें मदद कर सकते हैं।
कम पसीना भी खराब संकेत नहीं
हर व्यक्ति को पसीना अलग मात्रा में आता है। किसी को मौसम की वजह से ज्यादा पसीना आता है तो किसी को कम। फिटनेस स्तर कपड़े नमी तापमान और शरीर की बनावट भी फर्क डालती है। इसलिए कम पसीना आने पर यह नहीं मानना चाहिए कि वर्कआउट बेकार गया। असली बात यह है कि आपने कितनी नियमितता से एक्सरसाइज की और अपनी दिनचर्या को कितना बेहतर बनाया।
फैट लॉस के लिए क्या करें
फैट कम करने के लिए रोजमर्रा की डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। ज्यादा मीठा तला हुआ और जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाला खाना कम करें। खाने में प्रोटीन सब्जियां फल दालें और साबुत अनाज शामिल करें। रोज कुछ समय तेज चलना या कोई पसंदीदा एक्सरसाइज करें। पर्याप्त नींद भी जरूरी है क्योंकि अनियमित नींद भूख और दिनचर्या दोनों बिगाड़ सकती है।
पसीने के साथ पानी भी जरूरी
गर्मी में या ज्यादा मेहनत वाले वर्कआउट के दौरान शरीर से पानी तेजी से निकल सकता है। इसलिए पसीना आने पर पानी पीते रहना जरूरी है। चक्कर कमजोरी सिरदर्द मांसपेशियों में ऐंठन या उलझन महसूस हो तो तुरंत आराम करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें। पसीना फैट लॉस का पैमाना नहीं है बल्कि शरीर का संकेत है कि उसे ठंडा रहने और पानी की जरूरत है।
