देशभर में गणेश महोत्सव को लेकर तैयारियां जोरो पर है, गणेश चतुर्थी, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। इस वर्ष 2025 में गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान गणेश की मूर्ति को घरों और पंडालों में विधि-विधान के साथ स्थापित करते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।
गणेश जी को विघ्नहर्ता और सुख-समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। लेकिन, गणेश स्थापना के दौरान कुछ सामान्य गलतियां पूजा का फल कम कर सकती हैं गणेश चतुर्थी का पर्व भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मकता का प्रतीक है। गणेश जी की स्थापना सही विधि और नियमों के साथ करने से न केवल घर में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि वास्तु दोष भी दूर होते हैं। आइए जानते हैं उन पांच गलतियों के बारे में, जिनसे गणेश स्थापना के समय हर हाल में बचना चाहिए।
गलत दिशा में मूर्ति स्थापित करना
गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, गणेश जी की मूर्ति को उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या उत्तर दिशा में स्थापित करना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है। मूर्ति का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि यह दिशा भगवान शिव के निवास की मानी जाती है। दक्षिण दिशा में मूर्ति स्थापित करना अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है। साथ ही, मूर्ति का पिछला हिस्सा घर के मुख्य द्वार की ओर होना चाहिए। गलत दिशा में स्थापना से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता और घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकते हैं।
टूटी-फूटी मूर्ति
गणेश चतुर्थी के दौरान मूर्ति की शुद्धता और पूर्णता का विशेष महत्व है। टूटी-फूटी, क्षतिग्रस्त या अधूरी मूर्ति का उपयोग पूजा में करना अशुभ और दोषकारक माना जाता है। ऐसी मूर्ति नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकती है और पूजा का फल नहीं मिलता। मूर्ति का चयन करते समय यह सुनिश्चित करें कि वह पूर्ण और दोषमुक्त हो। साथ ही, मूर्ति में गणेश जी के प्रिय मोदक और उनके वाहन मूषक (चूहे) का चित्रण होना चाहिए, क्योंकि यह शुभता का प्रतीक है। घर में स्थापित करने के लिए 9 से 18 इंच की मूर्ति को आदर्श माा जाता है।
मूर्ति को सीधे जमीन पर रखना
गणेश जी की मूर्ति को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। मूर्ति को हमेशा लकड़ी की चौकी या पट्टे पर लाल, पीले या केसरिया रंग के कपड़े बिछाकर स्थापित करें। चौकी को गंगाजल से शुद्ध करें और उस पर अक्षत (चावल) बिछाएं। यह विधि न केवल शुभता बढ़ाती है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। मूर्ति को सीधे फर्श पर रखने से पूजा का प्रभाव कम हो सकता है और वास्तु दोष उत्पन्न हो सकते हैं।
दक्षिणावर्ती (दाईं सूंड वाली) मूर्ति
गणेश जी की मूर्ति का चयन करते समय उनकी सूंड की दिशा का विशेष ध्यान रखें। घर में स्थापना के लिए वामावर्ती (बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली) मूर्ति को शुभ माना जाता है, क्योंकि यह शांति, सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। दक्षिणावर्ती (दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली) मूर्ति मंदिरों या विशेष अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त होती है, क्योंकि इसकी पूजा में कठिन नियमों का पालन करना पड़ता है। घर में ऐसी मूर्ति स्थापित करने से पूजा का प्रभाव कम हो सकता है और बप्पा को प्रसन्न करना मुश्किल हो सकता है।
तुलसी या केतकी के फूल चढ़ाना
गणेश जी की पूजा में कुछ विशेष वस्तुओं का उपयोग वर्जित है। भगवान गणेश को तुलसी के पत्ते और केतकी के फूल अर्पित करना शास्त्रों में निषिद्ध माना गया है। इसके बजाय, गणेश जी को दूर्वा घास, लाल फूल (जैसे गुड़हल), मोदक, और लड्डू चढ़ाना चाहिए। दूर्वा का विशेष महत्व है, क्योंकि पौराणिक कथा के अनुसार, दूर्वा ने गणेश जी को अनलासुर के प्रभाव से मुक्ति दिलाई थी। गलत पुष्प या सामग्री चढ़ाने से पूजा अधूरी रह सकती है और बप्पा की कृपा प्राप्त नहीं होती।
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी 2025 पर गणपति स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है:
- तारीख: 27 अगस्त 2025 (बुधवार)
- समय: सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक
- अवधि: लगभग 2 घंटे 35 मिनट
यह मुहूर्त मध्याह्न काल में आता है, जो गणेश पूजन और मूर्ति स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
- अमृत: सुबह 7:33 बजे से 9:09 बजे तक
- शुभ: सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक
- शाम की पूजा: शाम 6:48 बजे से 7:55 बजे तक
आपको बता दें राहु काल (दोपहर 12:22 बजे से 1:59 बजे तक) के दौरान स्थापना और पूजा से बचें, क्योंकि यह समय अशुभ माना जाता है।



