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'एंटी-धुरंधर' या अधूरी मोहब्बत की दास्तान? दिलजीत की फिल्म पर क्यों छिड़ी नई बहस, पढ़ें यहां

'एंटी-धुरंधर' या अधूरी मोहब्बत की दास्तान? दिलजीत की फिल्म पर क्यों छिड़ी नई बहस, पढ़ें यहां

इम्तियाज अली की नई फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' इन दिनों चर्चा में है। फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन सोशल मीडिया पर एक अलग बहस छिड़ गई है। कुछ लोग फिल्म को 'एंटी-धुरंधर' कह रहे हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक सोशल मीडिया पोस्ट में फिल्म की तारीफ करते हुए इसे 'एंटी-धुरंधर' बताया गया। इसके बाद कई यूजर्स ने बिना फिल्म देखे ही इस पर अपनी राय देनी शुरू कर दी। देखते ही देखते फिल्म को पाकिस्तान के प्रति नरम रुख दिखाने वाली कहानी बताया जाने लगा।

असल कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी एक 95 साल के बुजुर्ग के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर अपने अधूरे प्यार को याद कर रहा है। यह कहानी भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। लेकिन फिल्म का फोकस राजनीति या किसी देश का पक्ष लेने पर नहीं, बल्कि बंटवारे से उजड़ गए लोगों के दर्द पर है। कहानी उस दौर की है जब सरहदें नहीं बंटी थीं और लोग अपने सपनों, रिश्तों और यादों के साथ जी रहे थे। बंटवारा इस प्रेम कहानी की सबसे बड़ी त्रासदी बनकर सामने आता है।

फिल्म में पाकिस्तान नहीं, बंटवारे का दर्द है

फिल्म देखने वाले दर्शकों का कहना है कि इसमें आज के पाकिस्तान की राजनीति या किसी तरह का समर्थन दिखाने की कोशिश नहीं की गई है। कहानी उन परिवारों की पीड़ा दिखाती है, जो अचानक अपने घर, जमीन और अपनों से बिछड़ गए। फिल्म का नायक अपने खोए हुए प्यार और बिछड़े हुए जीवन की यादों में जी रहा है। यही भावनात्मक संघर्ष पूरी कहानी का केंद्र है। इसलिए इसे किसी राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय मानवीय संवेदनाओं की कहानी के रूप में देखा जा रहा है।

कलाकारों और कहानी की हो रही तारीफ

फिल्म में दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह बुजुर्ग नायक की भूमिका में हैं, जबकि युवा किरदारों में वेदांग रैना और शरवरी नजर आए हैं। निर्देशन इम्तियाज अली का है, जिन्होंने इससे पहले कई यादगार प्रेम कहानियां दी हैं। संगीत ए. आर. रहमान का है, जिसे भी काफी सराहा जा रहा है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी भावनात्मक कहानी और कलाकारों का अभिनय माना जा रहा है।

दर्शकों से खुद फैसला करने की अपील

फिल्म को लेकर चल रही बहस के बीच एक सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या किसी फिल्म को सिर्फ सोशल मीडिया की राय के आधार पर जज करना सही है? 'मैं वापस आऊंगा' को लेकर भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। एक वर्ग इसे भावनात्मक प्रेम कहानी मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे अलग नजरिए से देख रहा है। ऐसे में कई फिल्म प्रेमियों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले फिल्म को खुद देखकर राय बनानी चाहिए। फिलहाल यह फिल्म अपने कंटेंट से ज्यादा सोशल मीडिया की बहस की वजह से सुर्खियों में बनी हुई है।

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