संसद भवन में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत हासिल कर भारत के 15वें उपराष्ट्रपति का पद संभाला। उन्होंने विपक्षी इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के अंतर से हराया। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। यह जीत एनडीए की रणनीतिक ताकत और दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयासों का प्रतीक मानी जा रही है।
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान 9 सितंबर 2025 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संसद भवन में आयोजित किया गया। निर्वाचक मंडल में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 781 सांसद शामिल थे, जिनमें से 767 ने मतदान में हिस्सा लिया। मतगणना के दौरान 752 वोट वैध पाए गए, जबकि 15 वोट अवैध घोषित किए गए।
राज्यसभा के महासचिव और रिटर्निंग ऑफिसर पीसी मोदी ने परिणामों की घोषणा करते हुए कहा, "एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 वोट मिले। उन्हें भारत का उपराष्ट्रपति चुना गया है।" विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले।
चुनाव में एनडीए की ताकत 425 सांसदों की थी, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 342 सांसद शामिल थे। इसके बावजूद, राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जो कुछ क्रॉस वोटिंग की ओर इशारा करता है। विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास 324 सांसद थे, जिनमें से कांग्रेस के 126 सांसद थे, लेकिन उनके उम्मीदवार को केवल 300 वोट मिले। बीजेडी, बीआरएस और शिरोमणि अकाली दल जैसे कुछ क्षेत्रीय दलों के 13 सांसदों ने मतदान से दूरी बनाई।
कौन हैं सीपी राधाकृष्णन?
सीपी राधाकृष्णन, जिनका पूरा नाम चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन है, का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में हुआ। वह तमिलनाडु के ओबीसी गोंडर-कोंगु वेलालर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। 17 साल की उम्र में 1974 में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और जनसंघ के माध्यम से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। बाद में जनसंघ के बीजेपी में विलय के बाद वह बीजेपी के सक्रिय सदस्य बने।
राधाकृष्णन ने 1998 और 1999 में कोयंबटूर से लोकसभा सांसद के रूप में दो बार जीत हासिल की। उन्हें "कोयंबटूर का वाजपेयी" के नाम से भी जाना जाता है। 2016 से 2020 तक उन्होंने कोयर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जहां उनके नेतृत्व में 2,532 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया गया। 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया, और जुलाई 2024 में वह महाराष्ट्र के राज्यपाल बने।
राधाकृष्णन ने व्यवसाय प्रशासन (BBA) में स्नातक की डिग्री हासिल की है और कॉलेज के दिनों में एक कुशल एथलीट रहे, खासकर टेबल टेनिस और लंबी दूरी की दौड़ में। उनकी मित्रवत छवि और सभी दलों के साथ अच्छे संबंधों ने उन्हें एक लोकप्रिय नेता बनाया है।
चुनाव से पहले की रणनीति
एनडीए ने 17 अगस्त 2025 को सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। उनकी उम्मीदवारी को दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में बीजेपी की जड़ें मजबूत करने और ओबीसी समुदाय के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना गया। दूसरी ओर, विपक्षी इंडिया गठबंधन ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया, जिन्हें संवैधानिक गरिमा और न्यायिक अनुभव का प्रतीक बताया गया। यह पहला अवसर था जब किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज ने उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा।
विपक्ष ने दावा किया था कि उनके पास 315 सांसदों का समर्थन है, लेकिन परिणामों में उनके उम्मीदवार को केवल 300 वोट मिले, जिसे कांग्रेस ने अपनी नैतिक और राजनीतिक हार के रूप में देखा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राधाकृष्णन को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वह संसदीय परंपराओं को बनाए रखेंगे और विपक्ष को समान सम्मान देंगे।
राधाकृष्णन की जीत के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा, "राधाकृष्णन एक उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति साबित होंगे।" मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी उनकी जीत को सामाजिक कल्याण के लिए उनके समर्पण का परिणाम बताया। विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा कि वह वैचारिक संघर्ष जारी रखेंगे।
राधाकृष्णन की जीत का महत्व
सीपी राधाकृष्णन की जीत को एनडीए की रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, खासकर दक्षिण भारत में जहां बीजेपी को अभी तक अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। उनकी ओबीसी पृष्ठभूमि और तमिलनाडु से संबंध सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का संदेश देता है।
राधाकृष्णन अब निवर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की जगह लेंगे, जिन्होंने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था। उनकी नियुक्ति से राज्यसभा में सरकार का प्रभाव और मजबूत होगा।



