बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बज चुकी है, लेकिन इस बार राज्य की सियासत में एक अनोखी खामोशी छाई हुई है। न तो सत्ताधारी NDA ने अपना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया है, न ही विपक्षी महागठबंधन (INDIA गठबंधन) ने। 2005 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है जब मतदाताओं को कोई स्पष्ट नेतृत्व विकल्प नहीं दिख रहा। इस बीच, महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच गई है। गठबंधन के घटक दलों ने कुल 243 सीटों पर 254 प्रत्याशी उतार दिए हैं, जिससे कम से कम 12 सीटों पर 'फ्रेंडली फाइट' हो रही है। नामांकन की अंतिम तिथि बीत चुकी है, और अब 23 अक्टूबर तक नाम वापसी का मौका है, लेकिन आंतरिक कलह से गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह चुनाव न केवल सत्ता की जंग है, बल्कि गठबंधनों की मजबूती की परीक्षा भी। विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। सत्ताधारी NDA (BJP-JD(U)-LJP-HAM) ने सीट बंटवारा तय कर लिया है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को CM फेस बनाने से हिचकिचाहट दिख रही है। एक ओर BJP की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि नीतीश ही अगले CM होंगे, वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान की महत्वाकांक्षा और प्रो. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की उभरती ताकत ने समीकरण जटिल कर दिए हैं। NDA के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "नीतीश जी की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए BJP विकल्प तलाश रही है, लेकिन अभी घोषणा का समय नहीं आया।"
दूसरी ओर, महागठबंधन की हालत और भी नाजुक है। RJD के नेतृत्व में बने इस गठबंधन में कांग्रेस, वाम दलों (CPI-ML, CPI, CPM) और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) शामिल हैं, लेकिन सीट बंटवारे पर सहमति न बन पाने से हाहाकार मच गया। RJD ने 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, कांग्रेस ने 61, वाम दलों ने 30 और VIP ने 15। कुल मिलाकर 254 नामांकन, जो 243 सीटों से 11 ज्यादा हैं। इससे 12 सीटों पर गठबंधन के अपने ही उम्मीदवार आमने-सामने आ गए हैं। वैशाली, कहलगांव, नरकटियागंज, बछवाड़ा, बाबूबरही, राजा पाकर, बिहार शरीफ, सिकंदरा, चैनपुर, सुल्तानगंज, लालगंज और कुटुंबा जैसी सीटों पर यह टकराव स्पष्ट है।
इन फ्रेंडली फाइट्स ने गठबंधन को कमजोर करने का काम किया है। उदाहरण के तौर पर, वैशाली में कांग्रेस के संजीव सिंह और RJD के अजय कुमार कुशवाहा आमने-सामने हैं। इसी तरह, कहलगांव में RJD के राजनिश भारती का मुकाबला कांग्रेस के प्रवीण सिंह कुशवाहा से है। नरकटियागंज में RJD के दीपक यादव बनाम कांग्रेस के शशवत केदार पांडे। इन टकरावों से न केवल वोट बंटेंगे, बल्कि कार्यकर्ताओं में भ्रम भी फैलेगा। RJD ने कुटुंबा (आरक्षित) सीट पर कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार न उतारकर एक झटका रोका, लेकिन लालगंज में अभी भी टकराव बरकरार है। कांग्रेस ने लालगंज से अपने उम्मीदवार आदित्य कुमार को नाम वापस ले लिया, जिससे RJD की शिवानी शुक्ला (मुन्ना शुक्ला की बेटी) को फायदा हुआ।
महागठबंधन की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने गठबंधन से किनारा कर लिया। JMM विधायक सुदीव्या कुमार ने RJD की 'राजनीतिक अपरिपक्वता' और कांग्रेस की मध्यस्थता न करने का आरोप लगाते हुए बाहर आने का फैसला किया। पूर्वी चंपारण और अन्य सीटों पर JMM के उम्मीदवारों ने स्वतंत्र लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन अंततः पूरे बिहार से नाम वापस ले लिए। पुनर्निर्वाचित सांसद पप्पू यादव ने भी कांग्रेस को RJD से गठबंधन तोड़ने की सलाह दी, कहा कि 'गठबंधन धर्म' का पालन नहीं हो रहा। यादव ने कहा, "BJP और चिराग पासवान नीतीश कुमार को अलग-थलग कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस को RJD के साथ चिपकना ठीक नहीं।"
RJD की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिशें जारी हैं। पार्टी ने 31 विधायकों के टिकट काटे और नए चेहरों को मौका दिया। इसमें 20 SC, 1 ST और 24 महिलाएं शामिल हैं। तेजस्वी यादव रघोपुर से लडेंगे, जहां उनका मुकाबला JD(U) के प्रोफेसर कुमार से होगा। लेकिन पारीहर में RJD महिलाओं के प्रकोष्ठ की प्रमुख रितु जायसवाल ने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया, क्योंकि टिकट पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे की बहू को मिला। तारापुर में VIP के सकलदेव बिंद ने RJD के पक्ष में नाम वापस लिया, लेकिन BJP में शामिल हो गए। गौरा बौरम में लालू प्रसाद ने VIP के संतोष साहनी का समर्थन किया, लेकिन अफजल अली नाम न वापस लेने पर अड़े हैं।
विपक्षी दलों ने अपनी मांगें कम की हैं। VIP, जो पहले 40-50 सीटें मांग रही थी, अब 16 पर संतुष्ट। CPI(ML) लिबरेशन 20 सीटों पर (2020 में 19 में से 12 जीतीं), CPI 9 पर (2 विधायक) और CPM 4 पर (2 विधायक) लड़ रही। फिर भी, कम से कम 6-10 सीटों पर फ्रेंडली फाइट बाकी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा, "हम तेजस्वी जी को CM फेस मानते हैं, लेकिन RJD की ओर से स्पष्टता नहीं आ रही।" RJD ने इसे खारिज करते हुए कहा कि गठबंधन की जीत ही CM का फैसला करेगी।
NDA की स्थिति मजबूत नजर आ रही है। BJP ने 110, JD(U) ने 45, LJP ने 30, HAM ने 5 और RLM ने 3 सीटें ली हैं। लेकिन NDA में भी नीतीश कुमार को लेकर असमंजस है। पप्पू यादव ने कहा, "केवल कांग्रेस ही नीतीश का सम्मान करेगी, BJP उन्हें अलग कर रही है।" वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज ने 200 से ज्यादा सीटों पर स्वतंत्र उम्मीदवार उतारे हैं, जो त्रिकोणीय मुकाबले को जन्म दे रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CM फेस न घोषित करने से मतदाता भ्रमित हैं। ISEAS के एक पेपर में कहा गया कि NDA आगे है, लेकिन महागठबंधन की कलह से इसका फायदा मिल सकता है। एक विशेषज्ञ ने कहा, "यह चुनाव गठबंधन की विश्वसनीयता पर लड़े जाएंगे। महागठबंधन अगर एकजुट न हुआ, तो 2020 जैसी हार दोहराएगी।



